अहिरौला पुलिस का प्रशंसनीय कार्य व 112 नंबर पुलिस द्वारा अधिकारों की मनमानी
आज हम एक ऐसी घटना की बात करने जा रहे है जहां हमें समाज की सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस विभाग के दो रूप देखने को मिले यहां एक ही सिक्के के दो पहलू वाली कहावत चरितार्थ होती दिखाई दे रही है
घटना आजमगढ़ जिले के अहिरौला थाना अंतर्गत मतलूबपुर कस्बे की है जहां बीती रात दो पक्षों के बीच घर के सामने ऑटो रिक्शा खड़ा करने को लेकर विवाद शुरू हुआ और विवाद बढ़कर मारपीट तक आ गया जिसमें एक पक्ष द्वारा दूसरे पक्ष की पिटाई कर दी गई बदले में दूसरे पक्ष के समर्थकों ने खड़ी की गई ऑटो को नुकसान पहुंचाया और उसका शीशा आदि तोड़ दिया घटना की जानकारी मिलने पर धर्मराज सिंह चौकी इंचार्ज माहुल जोकि पेट की परीक्षा के कारण अहिरौला थाने का कार्यभार देख रहे थे उनके द्वारा घटनास्थल पर पहुंचकर दोनों पक्षों को सुना गया और उन्होंने दोनों पक्षों को समझा कर मामले को सुलझा दिया और दोनों पक्षों के नुकसान को देखते हुए नुकसान की भरपाई करने का निर्णय करवाया जिससे दोनों पक्ष संतुष्ट हो गए और मामला रफा-दफा हो गया
लेकिन इस मामले की सूचना 112 नंबर की पुलिस को भी दी गई थी मामला रफा-दफा होने के 1 घंटे बाद PRV1057, 112 नंबर की पुलिस आई और एक पक्ष पर फोन ना उठाने के कारण झल्लाने लगी उस पर नाराजगी जताने के बाद एक पक्ष को पीटते हुए थाने पर लेकर आई और बाद में दूसरे पक्ष को भी पीटते हुए थाने पर लेकर आई जब कस्बा वासियों द्वारा 112 नंबर पुलिस के दरोगा से पूछा गया कि आपने बिना कारण जाने जब मामला रफा-दफा हो गया था तो बिना दोनों पक्षों को सुनें उनको पीटते हुए थाने पर क्यों लेकर आए तो उनका जवाब था कि मैं यहां की जनता से उब चुका हूं मैं यहां नौकरी नहीं करना चाहता हूं आपकी जहां इच्छा हो वहां जाकर मेरी शिकायत करिए मैं इनकी हत्या नहीं किया हूं सिर्फ पीटते हुए लेकर आया हूं जो करना हो कर लो उनके द्वारा कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया तब तक इस घटना की जानकारी अहिरौला थाना प्रभारी योगेंद्र बहादुर सिंह को दी गई जो रात में 9:00 बजे थाने पर पहुंचे उन्होंने धैर्य से दोनों पक्षों की बाते सुनी और दोनों पक्षों को समझा कर एवं संतुष्ट कर मामले को निपटाया जिससे दोनों पक्षों ने अहिरौला थाना प्रभारी योगेंद्र बहादुर सिंह और थाने के अन्य कर्मचारियों को धन्यवाद दिया परंतु 112 नंबर की पुलिस के प्रति नाराजगी दिखाई कस्बे वासियों ने कहा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं जहां अहरौला थाने की पुलिस मददगार है वही 112 नंबर पुलिस अपने अधिकारों का दुरुपयोग करती हैं 112 नंबर की पुलिस की इस तरह की कार्यवाही को क्या कहा जाए क्या यही उनका कर्तव्य है की गरीब जनता उनकी नाराजगी का शिकार हो एक ही महकमा परंतु दोनों के कार्यों में इतना अंतर क्यों ?
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