जब भी पूर्वांचल का जिक्र आता है … तो इसके सांस्कृतिक धार्मिक और राजनीतिक महत्त्व के अलावा जिस बात का जिक्र सबसे ज्यादा होता है वो है बाहुबलियों का जिक्र….. पूर्वांचल में एक से बढ़कर बाहुबली पैदा हुए जिन्होंने आगे चलकर ऐसा छत्रप स्थापित किया , जिसकी हाल फिलहाल कोई मिसाल देखने को नहीं मिलती ..पूर्वांचल के इन बाहुबलियों ने राजनीति के अखाड़े में भी अपने नाम का सिक्का चलवाया …या यूँ कहें की उनका सिक्का आज भी चलता है …
बात चाहे …शंकर तिवारी की हो …या फिर मुख्तार अंसारी …धनंजय सिंह …ब्रजेश सिंह …रमाकांत यादव की …….इन सबने राजनीति से लेकर पूर्वांचल में अपने नाम का सिक्का चलाया ….कुछ का रसूख तो ऐसा था…कि उनके अहाते तक यूपी पुलिस की हिम्मत भी नहीं हुई पहुँचने की…
इन्ही बाहुबलियों में से आज हम रमाकांत यादव का जिक्र करने जा रहे हैं , जो हाल फिलहाल चर्चा में बने हुए हैं और हाल ही में जेल भेजे गए हैं ..ये बताने की ज़रुरत नहीं है कि राजनीति के अखाड़े से लेकर पूर्वांचल के कोने – कोने में इस बाहुबली का दबदबा रहा है …सियासत से लेकर शासन – प्रशासन में रमाकांत यादव की तूती बोलती थी…. कभी सड़कों पर फर्राटा भर रही RKY लिखी गाड़ियां आपके नज़रों के सामने से भी गुजरी होंगी …इन गाड़ियां को देखकर किसी भी अधिकारी की हिम्मत नहीं होती थी कि इन गाड़ियों को रोक लें …
रमाकांत यादव ने लगभग 30 सालों से ज्यादा समय तक एक ऐसे साम्राज्य की स्थापना की , जिसने रमाकांत को रहस्य , रोमांच ,ताकत, पॉलिटिक्स पावर , सिस्टम का बेताज बादशाह बना दिया …..वो बाहुबल और उसकी ठसक आज भी जारी थी .
लेकिन कहते हैं न कि कब और किसका समय कैसे बदल जाए …यह कोई नहीं जानता…. पिछली सरकारों में रमाकांत यादव हमेशा प्रभावशाली स्थिति में रहे …पार्टी कोई हो ….जहाँ रमांकांत गए , वहां उनके लोग गए ..चुनाव दर –चुनाव जीतते – रमाकांत उस भाजपा में भी गए ,जिसका कमल उन्होंने आजमगढ़ जिले में पहली बार खिलाया था ..फिर पार्टी से रमाकांत यादव की दूरियाँ बढ़ी …और २०१९ के चुनाव में टिकट को लेकर जो सस्पेंस चला ,उस वक़्त ये मान लिया गया था कि अगर बीजेपी रमाकांत यादव को टिकट देती तो वह एक समय अखिलेश यादव को हारने की कूवत रखते थे ..लेकिन कहा जाता है कि उस समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिनेशलाल यादव निरहुआ को लेकर शीर्ष नेतृत्व से बातचीत किया और पार्टी ने भी राजनीति में योगी के बढ़ते क़द को देखते हुए उनकी बात मान ली और निरहुआ को भाजपा का प्रत्याशी घोषित कर दिया . इस फैसले ने बीजेपी से रमाकांत यादव का मोहभंग कर दिया और पार्टी के खिलाफ जकार अपने समर्थकों और अपने समाज के लोगों से अखिलेश यादव को वोट देने की अपील भी कर दी ..हालांकि उन्होंने कुछ ही समय में कांग्रेस ज्वाइन किया ,चुनाव लड़ा , चुनाव हार गए ….फिर अबू आसिम के आजमी के प्रयासों से सपा में उनकी वापसी हुई ..उनकी वापसी और के दौरान उनके एक बयान की काफी चर्चा हो रही थी …उन्होंने अपने एक बयान में कह दिया था कि अब सपा में मेरी लाश ही जायेगी ..खैर २०२२ विधानसभा चुनाव में फूलपुर पवई से रमाकांत यादव विधायक चुने गए .
अब यहीं से एक नए अध्याय का जन्म हो रहा था ..जब २०२२ विधानसभा चुनाव का प्रचार – प्रसार चल रहा था ,उसी दौरान जहाँ से रमाकांत यादव चुनाव लड़ रहे थे …उसी विधानसभा के अंतर्गत माहुल कसबे में फरवरी माह में ज़हरीली शराब काण्ड की ऐसी घटना होती है ,जिसने कईयों की ज़िन्दगी छीन लिया , कईयों को विधवा तो कईयों को अनाथ कर दिया , कईयों की ज़िन्दगी में ज़िन्दगी में जीवनभर के लिए अन्धेरा हो गया . घटना की जब जाँच – पड़ताल शुरू हुई तो जिस शराब ठीके से लोगों ने ज़हरीली शराब को खरीदा था …उस शराब ठीके का मालिक कोई और नहीं बल्कि बाहुबली रमाकांत यादव का भांजा रंगेश यादव था…उस वक़्त आजमगढ़ प्रशासन ने बड़ी कार्यवाही करते हुए रंगेश ,नदीम और बहुत सारे लोगों को गिरफ्तार करते हुए कईयों लाख की ज़हरीली शराब , केमिकल , शीशी , रैपर आदि भी बरामद किया …इस प्रकरण में गैंगस्टर में कार्यवाही हुई , कुर्की भी हुई ..उस वक़्त रमाकांत यादव ने एक बयान में कहा था …दोषी कोई भी ..प्रशासन को निष्पक्ष कारवाही करते हुए उसे गिरफ्तार करना चाहिए .
चुनाव समाप्त हुए , रमाकांत विधायक चुने जा चुके थे ….उनकी पार्टी के मुखिया करहल से विधायक बन चुके थे …एक तरफ CM योगी दुबारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे , तो दूसरी तरफ अखिलेश आजमगढ़ सदर के सांसद का पद छोड़ रहे थे ..क्योंकि उन्हें ये करना ही था ..या आजमगढ़ छोड़ते या फिर करहल …उन्होंने azamgarh छोड़ना ही बेहतर समझा ….
खैर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की दुबारा शपथ लेते हुए एक बार फिर से बाहुबलियों और माफियाओं पर टूट पड़े …अब वक़्त था आजमगढ़ लोकसभा चुनाव का …निरहुआ के समर्थन में एक जनसभा में CM योगी ने मंच से बोलते हुए कहा था ….इनके एक विधायक का नाम तो विधानसभा चुनाव के दौरान ज़हरीली शाराब काण्ड में भी आया था …दरअसल इनके से योगी का तात्पर्य अखिलेश यादव और उनकी पार्टी ….विधायक से तात्पर्य ..रमाकांत यादव से था ….सियासी पंडितों को भी ये बात समझ नहीं आई कि CM योगी के इस बयान के मायने क्या थे …
अचानक एक दिन २४ साल पुराने मारपीट और गोलीबारी के एक मुकदमे में आज़मगढ़ जिले की अहरौला पुलिस गिरफ्तार करती है . उन्हें एक ऐसे मामले में कोर्ट ने गिरफ्तार करके जेल भेजने के आदेश कोर्ट ने दिए थे , जिसको लगभग जिले की जनता भी भूल गयी थी . इसी दौरान रमाकांत यादव किसी अन्य मामले में कोर्ट में पेशी पर आये थे , वहीँ से कोर्ट ने उस २४ साल पुराने मुकदमे में जेल भेज दिया . जब रमाकांत जेल गए तो लोगों ने फिरसे उस २४ साल पुराने मामले को याद करना शुरू कर दिया … 1998 में रमाकांत यादव सपा से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे…अकबर अहमद डंपी बसपा के टिकट से मैदान में थे….. घटना वाले दिन डंपी अपने 50 समर्थकों के साथ अंबारी पहुँच गए थे … रमाकांत यादव और उमाकांत यादव अपने 50 समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे… दोनों तरफ से जमकर फायरिंग हुई।
इस मामले में रमाकांत यादव के साथ पूर्व सांसद अकबर अहमद डंपी समेत अन्य पर हत्या के प्रयास का मुकदमा फूलपुर कोतवाली में दर्ज किया गया था…. 2016 में फूलपुर बाजार में चक्का जाम के मामले में भी रमाकांत यादव आरोपी हैं…. इन मामलों में रमाकांत यादव ने हाईकोर्ट से स्टे ले रखा था… स्टे खत्म होते ही कोर्ट ने जेल भेज दिया…..
रमाकांत अभी जेल में ही हैं …इसी दौरान आई एक खबर ने सभी को हैरान कर दिया ..माहुल ज़हरीली शाराब काण्ड में पुलिस ने जाँच के दौरान रमाकांत यादव को आरोपी बनाया , पोलके का कहना था कि जाँच के दौरान रमाकांत यादव की संलिप्तता भी पायी गयी है . इसके साथ ही पुलिस ने कोर्ट से रमाकांत यादव से पूछताछ करने के लिए पुलिस रिमांड की मांग कर दिया , जिसे कोर्ट ने मंज़ूर कर लिया . अब रमाकांत पुलिस की रिमांड पर हैं . हालांकि उनके अधिवक्ता आद्या शंकर दुबे ने अपने पेशे का हवाला देते हुए कहाकि कहना उचित नहीं होगा , लेकिन ये शासन के दबाव में प्राशासन ये कार्यवाही कर रहा है . इस दौरान पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने बयान देते हुए कहाकि , क्योंकि पहले से ही गैंगस्टर में मुकदमा दर्ज है , कार्यवाही जारी है तो रमाकांत यादव को भी इन्ही धाराओं में पाबन्द किया जाएगा ..और जो भी कानूनी कार्यवाही है वो अमल में लायी जायेगी .
इसके बाद पुलिस और प्रशासन ने अपनी कार्यवाही का दायरा बढाते हुए रमाकांत के भांजे की अवैध धन से अर्जित ६७ लाख १६ हजार की एक संपत्ति को कुर्क कर दिया …पुलिस और प्रशासन की ये कार्यवाही रमाकांत यादव के साथ भी हो सकती है , क्योंकि प्रशासन इसका स्पष्ट सन्देश दे चुका है . इस मामले से जुड़े हर अपडेट आप तक पहुंचाते रहेंगे ….लेकिन जाते – जाते एक सवाल है कि जिस अवैध संपत्ति को प्रशासन ने कुर्क किया है , उसको लेकर लोगों में चर्चा है कि ज़हरीली शराब काण्ड के प्रभावितों में उस संपत्ति को बेचकर उसका पैसा बाँट दिया जाए , ताकि उनका दुःख कुछ कम हो सके ..आपकी क्या राय ही …या क्या सोचते हैं आप हमें कमेन्ट करके ज़रूर बताएं …जय हिन्द
