आजमगढ़। सरकारी बैंकों के निजीकरण के लिए मॉनसून सत्र में लाए जाने वाले बैंकिंग कानून संशोधन विधेयक का उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक कांग्रेस के प्रदेश सचिव संदीप कपूर ने जमकर भर्त्सना की है। प्रदेश सचिव ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति/प्रेसवार्ता में बताया कि इससे पहले आज ही के दिन 1969 में आयरन लेडी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था। वर्तमान मोदी सरकार सरकारी बैंकों के निजीकरण के लिए बैंकिंग कानून संशोधन विधेयक लाने जा रही है। जिस पर समस्त देशवासियों को इसका पूरजोर विरोध करना होगा नहीं तो बैंकों के निजी हाथों में जाते ही बैंक की नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था भी खत्म हो जाएगी। जिससे पिछड़े, दलित, आदिवासी और गरीब सवर्णों के बच्चे बैंकों में नौकरी नहीं कर पाएंगे। पहले ही देश के नौजवानों बेरोजगारी से जूझ रहे है, वहीं सरकार केवल राजनैतिक द्वेष और अपने चहेतों पूंजीपूतियों को लाभ दिलाने के लिए इस तरह का बदलाव करने जा रही हैं। अगर ऐसा हो गया तो वैश्विक मंदी आते ही हमोर बैंकों पर इसका सीधा असर पड़ेगा जिससे देश का हर व्यक्ति प्रभावित होगा। इसी मुद्दे को लेकर अल्पसंख्यक कांग्रेस इस कानून का पूरजोर विरोध करेगी।
प्रदेश सचिव संदीप कपूर ने कहा कि मोदी सरकार सरकारी बैंकों को अपने उद्योगपति मित्रों को दान में देने के लिए बैंकिंग कानून संशोधन विधेयक लाने जा रही है। जिसके पास हो जाने के बाद इन बैंकों में सरकार का शेयर 51 प्रतिशत से घट कर 26 प्रतिशत हो जाएगा। जिससे इन बैंकों में जमा आम आदमी का पैसा एक तरह से निजी उद्योगपतियों का हो जाएगा। इन सरकारी बैंकों को मोदी जी के वे मित्र खरीदेंगे जो ख़ुद सरकारी बैंकों के क़र्ज़दार हैं और अपना बकाया कर्ज़ मोदी सरकार से माफ करा लेते हैं। ऐसे उदाहरण भी दिखेंगे जहाँ मोदी जी के मित्र उसी बैंक से कर्ज़ लेकर उसी बैंक को खरीद लेंगे।
अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष नदीम खान ने कहाकि पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने 1969 में 19 जुलाई को बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर निजी बैंकों के लाभ को राष्ट्र के विकास में लगाने और उनको जनता के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए उनमें सरकार की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत रखी थी। जिससे बैंक जनता के नियंत्रण में रहें। लेकिन अब मोदी जी इन बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत करने और अगले कुछ सालों में पूरी तरह खत्म कर देने के लिए क़ानून ला रहे हैं। जिससे इन बैंकों का अब जनता द्वारा चुनी हुई सरकार के प्रति कोई जाबदेही नहीं रह जाएगी। उल्टे वे अब मनमाने व्याज दर पर सरकार को ही कर्ज़ देने लगेंगे। इस पर हर व्यक्ति को गंभीर होना पड़ेगा।
इस अवसर पर राना खातून, शम्भू शास्त्री, जावेद, नजम शमीम, मोहम्मद जकी, अमित राय, रंजीत सिंह, आदि मौजूद रहे।
प्रदेश सचिव संदीप कपूर ने कहा कि मोदी सरकार सरकारी बैंकों को अपने उद्योगपति मित्रों को दान में देने के लिए बैंकिंग कानून संशोधन विधेयक लाने जा रही है। जिसके पास हो जाने के बाद इन बैंकों में सरकार का शेयर 51 प्रतिशत से घट कर 26 प्रतिशत हो जाएगा। जिससे इन बैंकों में जमा आम आदमी का पैसा एक तरह से निजी उद्योगपतियों का हो जाएगा। इन सरकारी बैंकों को मोदी जी के वे मित्र खरीदेंगे जो ख़ुद सरकारी बैंकों के क़र्ज़दार हैं और अपना बकाया कर्ज़ मोदी सरकार से माफ करा लेते हैं। ऐसे उदाहरण भी दिखेंगे जहाँ मोदी जी के मित्र उसी बैंक से कर्ज़ लेकर उसी बैंक को खरीद लेंगे।
अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष नदीम खान ने कहाकि पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने 1969 में 19 जुलाई को बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर निजी बैंकों के लाभ को राष्ट्र के विकास में लगाने और उनको जनता के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए उनमें सरकार की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत रखी थी। जिससे बैंक जनता के नियंत्रण में रहें। लेकिन अब मोदी जी इन बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत करने और अगले कुछ सालों में पूरी तरह खत्म कर देने के लिए क़ानून ला रहे हैं। जिससे इन बैंकों का अब जनता द्वारा चुनी हुई सरकार के प्रति कोई जाबदेही नहीं रह जाएगी। उल्टे वे अब मनमाने व्याज दर पर सरकार को ही कर्ज़ देने लगेंगे। इस पर हर व्यक्ति को गंभीर होना पड़ेगा।
इस अवसर पर राना खातून, शम्भू शास्त्री, जावेद, नजम शमीम, मोहम्मद जकी, अमित राय, रंजीत सिंह, आदि मौजूद रहे।
