45 वर्ष की उम्र में बने मेडिकल कॉलेज के डीन, डॉ. दीपक होवाले की उपलब्धि बनी चर्चा का विषय
सिलवासा/सूरत। चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. दीपक सदाशिव होवाले का नाम एक बार फिर चर्चा में है। वर्तमान में सूरत म्युनिसिपल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (SMIMER) के डीन के रूप में कार्यरत डॉ. होवाले ने वर्ष 2018 में मात्र 45 वर्ष की आयु में सिलवासा स्थित नमो मेडिकल कॉलेज के नियमित डीन का पद संभालकर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की थी।
आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार 24 मई 1973 को जन्मे डॉ. होवाले को 16 अक्टूबर 2018 को दादरा एवं नगर हवेली के सरकारी नमो मेडिकल कॉलेज, सिलवासा का डीन नियुक्त किया गया। उस समय उनकी आयु लगभग 45 वर्ष 5 माह थी, जिसे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डीन पद के लिए अपेक्षाकृत कम उम्र माना जाता है।
डॉ. होवाले ने वर्ष 2000 में ट्यूटर के रूप में अपने शैक्षणिक करियर की शुरुआत की। इसके बाद वे 2004 में असिस्टेंट प्रोफेसर, 2009 में एसोसिएट प्रोफेसर और 2012 में प्रोफेसर बने। लगभग 18 वर्षों के शैक्षणिक अनुभव के बाद उन्हें डीन का दायित्व सौंपा गया।
नमो मेडिकल कॉलेज, सिलवासा में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने संस्थान के विकास, शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करने तथा मेडिकल शिक्षा के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद 19 फरवरी 2022 को उन्होंने सूरत स्थित SMIMER के डीन का पदभार संभाला, जहां वे वर्तमान में भी सेवाएं दे रहे हैं।
SMIMER में डीन के रूप में डॉ. होवाले मेडिकल एजुकेशन यूनिट (MEU) और मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MRU) के अध्यक्ष भी हैं। उनके नेतृत्व में MBBS और पोस्ट ग्रेजुएट सीटों के विस्तार की दिशा में कार्य हुआ है। साथ ही संस्थान में सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा सेवाओं को शुरू करने की पहल भी की जा रही है, जिससे सूरत और आसपास के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
हालांकि डॉ. होवाले की नियुक्ति कम उम्र में हुई थी, लेकिन उन्हें “भारत के सबसे युवा मेडिकल कॉलेज डीन” के रूप में आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं किया जा सकता। इसका कारण यह है कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) अथवा अन्य सरकारी संस्थाओं के पास देशभर के मेडिकल कॉलेजों के डीन की आयु और नियुक्ति तिथियों का कोई सार्वजनिक राष्ट्रीय डेटाबेस उपलब्ध नहीं है।
उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर इतना अवश्य कहा जा सकता है कि डॉ. दीपक सदाशिव होवाले देश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कम उम्र में डीन नियुक्त होने वाले गिने-चुने अधिकारियों में शामिल हैं। चिकित्सा शिक्षा, संस्थागत विकास और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है।
