सूरत में बाढ़ जैसे हालात: नाव में निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारी, जलभराव से जूझती जनता ने उठाए सवाल
संवाददाता: सुमित शुक्ला
सूरत। गुजरात के सूरत शहर में लगातार हुई भारी बारिश के बाद कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। घुटनों तक भरे गंदे पानी के बीच हजारों लोग रहने को मजबूर हैं। इस बीच प्रशासन द्वारा किए जा रहे निरीक्षण और राहत कार्यों को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
स्थिति का जायजा लेने के लिए शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव मिलिंद तोरवणे (IAS), सूरत की प्रभारी सचिव शालिनी अग्रवाल (IAS) तथा सूरत नगर निगम (SMC) के आयुक्त एम. नागराजन (IAS) ने लिंबायत जोन के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। अधिकारियों ने मीठी खाड़ी के आसपास स्थित बेथी कॉलोनी, रावनगर, कमरूनगर, माजदा पार्क, पुराना कमरूनगर और रतनजीनगर सहित कई इलाकों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारी नाव के जरिए प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचे। हालांकि इस दौरे के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। कई निवासियों का कहना है कि अधिकारी सुरक्षित नावों और लाइफ जैकेट के साथ हालात का जायजा ले रहे हैं, जबकि आम लोग कई दिनों से जलभराव, गंदगी और संक्रामक बीमारियों के खतरे के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर साल मानसून से पहले जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन भारी बारिश होते ही मीठी खाड़ी से सटे इलाके जलमग्न हो जाते हैं। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
लोगों का यह भी कहना है कि प्रशासनिक दौरे केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं और जमीनी स्तर पर राहत कार्य अपेक्षित गति से नहीं दिखाई दे रहे। नागरिकों ने जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान, बेहतर ड्रेनेज व्यवस्था और प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत उपलब्ध कराने की मांग की है।
बारिश के बाद उत्पन्न हालात ने एक बार फिर सूरत नगर निगम की प्री-मानसून तैयारियों और जल निकासी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई और राहत कार्यों की प्रभावशीलता पर टिकी हुई है।
