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बुनकरों की बिजली समस्या को लेकर गुफरान मंसूरी ने सांसद धर्मेंद्र यादव को सौंपा ज्ञापन

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रिपोर्ट – मो. शकीब अंसारी, आज़मगढ़  

मुबारकपुर। बुनकरों की बिजली बिल से जुड़ी समस्याओं और फ्लैट रेट योजना में संशोधन की मांग को लेकर बुनकर नेता गुफरान मंसूरी ने बुधवार को समाजवादी पार्टी के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान सांसद धर्मेंद्र यादव को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से छोटे और गरीब बुनकरों को बिजली बिल में राहत देने सहित कई महत्वपूर्ण मांगें सांसद के सामने रखी गईं।

बुनकर नेता गुफरान मंसूरी ने अटल बिहारी वाजपेयी पावरलूम बुनकर फ्लैट रेट योजना में संशोधन की मांग करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था में पांच किलोवॉट तक की दर 400 रुपये प्रति पावरलूम निर्धारित है। इसे बदलकर 400 रुपये प्रति किलोवॉट किए जाने की जरूरत है, ताकि छोटे और मजदूर बुनकरों को बिजली बिल के बढ़ते बोझ से राहत मिल सके।

ज्ञापन में कहा गया कि प्रदेश के हजारों छोटे बुनकर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। बिजली की बढ़ती लागत का सीधा असर उनके पारंपरिक पावरलूम कारोबार पर पड़ रहा है। बुनकरों का कहना है कि केवल फ्लैट रेट की सीमा बढ़ाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, बल्कि बिजली की दरों में भी राहत देना जरूरी है।

गुफरान मंसूरी ने सांसद धर्मेंद्र यादव के सामने कुल छह प्रमुख मांगें रखीं। इनमें 400 रुपये प्रति पावरलूम के स्थान पर 400 रुपये प्रति किलोवॉट फ्लैट रेट लागू करना, बिजली बिल में फिक्स रेट और मिलने वाली छूट की राशि अलग-अलग दर्शाना तथा पूर्व की तरह पासबुक व्यवस्था लागू करना शामिल है।

इसके अलावा बिजली कनेक्शन लेने, कनेक्शन विच्छेदन और नाम संशोधन की प्रक्रिया को सरल एवं सस्ता करने की मांग की गई। बुनकरों की समस्याओं और सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए प्रत्येक तीन माह में बुनकर बाहुल्य जिलों में ‘बुनकर बंधु’ की बैठक आयोजित कराने की भी मांग उठाई गई।

ज्ञापन में हथकरघा बुनकर उपयोगी विद्युत बिल छूट योजना के तहत घरेलू कनेक्शन पर मिलने वाली वार्षिक 3,936 रुपये की छूट को बढ़ाकर 7,500 रुपये करने तथा किसानों की तर्ज पर पात्र बुनकर परिवारों के लिए ‘बुनकर सम्मान निधि’ योजना शुरू करने की मांग भी की गई।

गुफरान मंसूरी ने कहा कि ये मांगें किसी एक संस्था या संगठन की नहीं, बल्कि पूरे बुनकर समाज की आवाज हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह किसान देश के लोगों का पेट भरता है, उसी तरह बुनकर समाज लोगों के तन को ढकने का काम करता है। बुनकरों को बिजली बिल में राहत मिलने से पारंपरिक पावरलूम उद्योग को मजबूती मिलेगी और हजारों बुनकर परिवारों की रोजी-रोटी सुरक्षित रह सकेगी।

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