गुजरात में शराबबंदी पर फिर सवाल, सूरत में ऑटो रिक्शा से विदेशी शराब की बड़ी खेप बरामद
संवाददाता : सुमित शुक्ला
सूरत। गुजरात में शराबबंदी को लेकर सरकार के दावों के बीच सूरत से सामने आई एक पुलिस कार्रवाई ने एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लसकाना इलाके में पुलिस ने एक ऑटो रिक्शा से अवैध विदेशी शराब की बड़ी खेप बरामद करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, बरामद शराब की कीमत करीब 67,878 रुपये है, जबकि 60 हजार रुपये कीमत के ऑटो रिक्शा को भी जब्त किया गया है। कुल जब्त माल की कीमत 1,27,878 रुपये बताई गई है।
मुखबिरी के आधार पर पुलिस ने की कार्रवाई
लसकाना पुलिस स्टेशन की टीम को अवैध शराब की तस्करी के संबंध में सटीक सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस ने खड़सद गांव से वाई जंक्शन गढ़पुर जाने वाले मार्ग पर नाकाबंदी की। इसी दौरान पुलिस ने एक ऑटो रिक्शा को रोककर उसकी तलाशी ली।
तलाशी के दौरान ऑटो से विदेशी शराब की 446 छोटी बोतलें बरामद हुईं। पुलिस ने मौके से चार लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद सलमान सब्बीर मंसूरी, आरतीबेन रमेशभाई सिंह, काजलबेन रमेशभाई सिंह और भाग्यश्री धनराज शिरोडकर के रूप में हुई है।
पुलिस ने बरामद शराब और ऑटो रिक्शा को कब्जे में लेकर मामले की आगे जांच शुरू कर दी है।
पुलिस टीम की कार्रवाई की सराहना
अवैध शराब की खेप पकड़ने में पुलिस इंस्पेक्टर एम.बी. झाला, पीएसआई एन.आर. पटेल और उनकी टीम की भूमिका बताई जा रही है। मुखबिरी के आधार पर की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने शराब की तस्करी कर रहे आरोपियों को पकड़ने में सफलता हासिल की है।
हालांकि, इस कार्रवाई के साथ ही गुजरात में शराबबंदी को लेकर एक बड़ा सवाल भी सामने आता है। सरकार की ओर से अवैध गतिविधियों और अपराध के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई तथा जीरो टॉलरेंस की नीति की बात कही जाती रही है। इसके बावजूद शराबबंदी वाले राज्य में शराब की खेप का लगातार पकड़ा जाना व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े करता है।
सूरत में ही शराब की खेप मिलने से उठे सवाल
सूरत गुजरात के प्रमुख शहरों में शामिल है और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी का गृह नगर भी है। ऐसे में सूरत के इलाके में ऑटो रिक्शा के जरिए विदेशी शराब की तस्करी का मामला सामने आना सरकार और पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती माना जा सकता है।
सवाल यह है कि अगर गुजरात की सीमाओं पर कड़ी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था है, तो पड़ोसी राज्यों से शराब आखिर राज्य के अंदर तक कैसे पहुंच रही है? क्या तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई केवल शराब की खेप पकड़ने तक सीमित है या इसके पीछे काम कर रहे बड़े नेटवर्क तक भी पुलिस पहुंच रही है?
छोटे तस्करों की गिरफ्तारी से आगे बढ़ेगी जांच?
इस मामले में चार आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, लेकिन अब जांच की दिशा पर भी नजर रहेगी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि शराब कहां से लाई गई थी और इसे सूरत में किसे पहुंचाया जाना था। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि इस नेटवर्क के पीछे किसी बड़े तस्कर या संगठित गिरोह की भूमिका सामने आती है या नहीं।
तीन महिलाओं की गिरफ्तारी ने भी शराब तस्करी के बदलते तरीकों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अगर तस्करी के लिए महिलाओं या अन्य लोगों को आगे किया जा रहा है, तो पुलिस के सामने पूरे नेटवर्क की पहचान करना और उसके मुख्य संचालकों तक पहुंचना बड़ी चुनौती है।
‘जीरो टॉलरेंस’ पर विपक्ष को मिल सकता है मुद्दा
गुजरात में शराबबंदी लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है। सरकार जहां शराब तस्करी और अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दावा करती है, वहीं विपक्ष ऐसे मामलों को सरकार की शराबबंदी नीति की विफलता से जोड़ता रहा है।
लसकाना की यह कार्रवाई पुलिस की सफलता जरूर है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी छोड़ जाती है कि जब एक ऑटो रिक्शा में 446 बोतलें शराब पहुंच सकती हैं, तो राज्य में सक्रिय बड़े तस्करी नेटवर्क की वास्तविक स्थिति क्या है।
अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले की जांच को केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित रखती है या शराब की सप्लाई के पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क और उसके कथित सरगनाओं तक पहुंचती है। यही कार्रवाई सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे की असली परीक्षा भी मानी जाएगी।
