आजमगढ़।
प्रसिद्ध समाजवादी चिंतक विजय बहादुर राय की दूसरी पुण्यतिथि के अवसर पर शुक्रवार को दैनिक देवव्रत कार्यालय में एक शोकसभा का आयोजन किया गया। इस दौरान पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनके विचारों और संघर्षपूर्ण जीवन को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
सभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार विजय कुमार देवव्रत ने कहा कि विजय बहादुर राय ऐसे समाजवादी चिंतक थे, जो निरंतर परिवर्तन की शक्तियों के साथ एकजुट रहे। उन्होंने समाजवादी राजनीति की सीमाओं को तोड़ते हुए नए राजनीतिक विकल्पों की ओर देखने का साहस दिखाया।
उन्होंने कहा कि एक जमींदार परिवार से निकलकर विजय बहादुर राय ने सामाजिक परिवर्तन के लिए चल रहे राजनीतिक आंदोलनों के माध्यम से खुद को डॉ. लोहिया और राजनारायण की विचारधारा से जोड़ा और जीवन के अंतिम समय तक सड़क की राजनीति से जुड़े रहे।
वरिष्ठ पत्रकार अशोक वर्मा ने कहा कि विजय बहादुर राय हमेशा हिंदुत्ववादी सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ मुखर रहे और लोकतंत्र तथा संविधान के मूल्यों की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष करते रहे।
वहीं वरिष्ठ पत्रकार धर्मेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि विजय बहादुर राय ने अपने जीवन में ईमानदारी और आलोचनात्मक विवेक को कभी मरने नहीं दिया। यही कारण था कि वे सत्ता की हर जनविरोधी नीति के खिलाफ खुलकर आवाज उठाते रहे।
शोकसभा में सुधीर राय, मोहम्मद असलम, अवनीश उपाध्याय, ज्ञानेन्द्र चतुर्वेदी, विवेक गुप्ता, सचिन श्रीवास्तव, रतन त्रिपाठी, मनोज जायसवाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे और उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
