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लव जिहाद–धर्मांतरण विवाद के बाद KGMU में PAC तैनाती, कुलपति की पहल पर OPD बंदी टली….

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लखनऊ।
लव जिहाद और कथित धर्मांतरण से जुड़े मामले के बाद किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में हालात दिनभर बेहद तनावपूर्ण रहे। दिनभर चले घटनाक्रम के बाद फिलहाल OPD सेवाएं बंद नहीं की जाएंगी। कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद के समझाने और प्रमुख सचिव गृह के साथ हुई वार्ता की अहम जानकारियां साझा किए जाने के बाद डॉक्टर और कर्मचारी संगठनों ने मरीजों के हित में हड़ताल का फैसला टाल दिया। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए परिसर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और PAC/PSC की तैनाती कर दी गई है।

दरअसल, बीते शुक्रवार को राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के KGMU पहुंचने के दौरान उनके समर्थकों पर हंगामा और तोड़फोड़ के आरोप लगे थे। इस घटना के बाद से ही डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों में नाराजगी थी। आरोप था कि कुलपति कार्यालय के बाहर न सिर्फ शोर-शराबा हुआ बल्कि महिला कर्मचारियों के साथ अभद्रता भी की गई। चीफ प्रॉक्टर की ओर से तहरीर देने के बावजूद 72 घंटे बीत जाने के बाद भी FIR दर्ज न होने से आक्रोश और बढ़ गया।

OPD बंदी का फैसला टला

सोमवार को हालात उस समय और बिगड़ गए थे जब संयुक्त कर्मचारी-डॉक्टर संगठनों ने 13 जनवरी को OPD बंद रखने का अल्टीमेटम दे दिया। उनका कहना था कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो केवल इमरजेंसी सेवाएं ही चालू रहेंगी। इसके बाद कुलपति ने पहले राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद कुलपति को कर्मचारी संगठनों से संवाद कर हालात संभालने के निर्देश दिए।

शाम को बुलाई गई बैठक में कुलपति ने प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद के साथ हुई बातचीत का ब्योरा साझा किया और न्याय का भरोसा दिलाया। इसके बाद सभी संगठनों ने मरीजों के हित में OPD बंदी का फैसला अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया। KGMU प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मंगलवार को सामान्य कामकाज होगा और आगे की रणनीति पर बैठक के बाद निर्णय लिया जाएगा।

जांच STF को सौंपी गई

इस पूरे प्रकरण की जांच अब विश्वविद्यालय की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी से हटाकर स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सौंप दी गई है। पहले 25 दिसंबर को कुलपति ने 7 सदस्यीय कमेटी गठित की थी, जिसने कई बैठकों में पैथोलॉजी विभाग के फैकल्टी, स्टाफ और पीड़िता के बयान दर्ज किए थे। कमेटी के एक्सपर्ट सदस्य और पूर्व डीजीपी भावेश कुमार सिंह ने जांच के दौरान साजिश के संकेत मिलने पर इसे STF को सौंपने की सिफारिश की थी। मुख्यमंत्री स्तर से भी इसी दिशा में निर्णय लिया गया।

KGMU प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के मुताबिक शुरुआती जांच में किसी संगठित धर्मांतरण गैंग की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामले की संवेदनशीलता और दायरे को देखते हुए अब STF ही आगे की जांच करेगी। कमेटी से जुड़े सभी दस्तावेज सील कर कुलपति कार्यालय में सुरक्षित रख दिए गए हैं और STF के मांगते ही उन्हें सौंप दिया जाएगा।

सुरक्षा बढ़ी, माहौल तनावपूर्ण

OPD बंदी और संभावित आंदोलन को देखते हुए KGMU परिसर में पुलिस बल तैनात किया गया है। PAC/PSC के जवान कुलपति कार्यालय और संवेदनशील स्थानों पर मौजूद हैं। LIU भी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की अव्यवस्था से निपटने के लिए पूरी तैयारी है।

क्या है पूरा मामला

पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब KGMU में एमडी पैथोलॉजी की पढ़ाई कर रही एक महिला डॉक्टर ने 17 दिसंबर को दवा की ओवरडोज लेकर आत्महत्या की कोशिश की। गंभीर हालत में उसे ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि सहपाठी डॉक्टर रमीज ने उसे लव जिहाद में फंसाया और इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव बनाया। आरोप यह भी है कि आरोपी पहले से शादीशुदा है और पहले भी धर्मांतरण कर शादी कर चुका है।

मामले की शिकायत राज्य महिला आयोग और मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर की गई थी। 24 दिसंबर को विशाखा समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद आरोपी डॉक्टर को निलंबित कर परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी गई और FIR दर्ज की गई। आरोपी के माता-पिता की संलिप्तता सामने आने पर उन्हें भी गिरफ्तार किया गया।

आगे क्या

फिलहाल OPD सेवाएं जारी रहेंगी, लेकिन कर्मचारी और डॉक्टर संगठन सतर्क हैं। उनका कहना है कि अगर जल्द FIR और सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन फिर तेज हो सकता है। वहीं प्रशासन और सरकार का दावा है कि STF की जांच से पूरे मामले की परतें खुलेंगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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