उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की राजनीति इन दिनों नए तेवरों के साथ गर्माई हुई है। कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के पुत्र और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता अरुण राजभर अतरौलिया विधानसभा क्षेत्र के गांव-गांव पहुंचकर जनचौपाल कर रहे हैं। भोजपुरी की सहज और चुटीली भाषा में संवाद करते हुए वे न सिर्फ ग्रामीणों की बातें सुन रहे हैं, बल्कि मौके पर ही अधिकारियों से संपर्क कर समस्याओं के समाधान की कोशिश भी कर रहे हैं।
इसी क्रम में बुधवार को अतरौलिया विधानसभा क्षेत्र के भीखपुर गांव में आयोजित जनचौपाल में अरुण राजभर ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाका होने के बावजूद भीखपुर वर्षों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। नरिया–सिकंदरपुर मार्ग की जर्जर हालत का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इस सड़क पर आए दिन हादसे होते रहे हैं, कई लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई।
अरुण राजभर ने कहा कि चुनाव के समय नेताओं की भीड़ गांवों में नजर आती है, लेकिन वोट पड़ते ही वही गांव उनकी प्राथमिकता से बाहर हो जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भीखपुर में पिछले 15 साल से सड़क निर्माण का इंतजार किया जा रहा है, जबकि सरकार विकास के लिए नियमित रूप से धन जारी कर रही है। सवाल यह है कि यह धन आखिर पहुंच कहां रहा है?
बिजली व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि गांव में लगभग 500 मीटर तक बिजली के तार तो खींच दिए गए हैं, लेकिन खंभे न लगने से आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी। नतीजा यह कि पूरा गांव आज भी अंधेरे में रहने को मजबूर है। उन्होंने इसे जनप्रतिनिधियों की उदासीनता बताते हुए कहा कि यदि निधि का सही उपयोग होता, तो गांव कब का रोशन हो चुका होता।
अरुण राजभर ने बताया कि भीखपुर में केवट, प्रजापति और गोंड समाज के करीब 800 लोग रहते हैं, जिनकी समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि बिजली संकट को लेकर उन्होंने सीधे प्रदेश के ऊर्जा मंत्री से बात की है, जिन्होंने सर्वे कराकर समाधान का आश्वासन दिया है। सड़क, आवास, शौचालय, नाली और खरंजा जैसी समस्याओं को लेकर भी शासन और अधिकारियों को अवगत कराया गया है।
जनचौपाल के दौरान उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि लोकतंत्र में वोट ही सबसे बड़ा हथियार है। ₹500 या शराब के बदले वोट देने की प्रवृत्ति पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि जैसे परिवार की सुरक्षा की जाती है, वैसे ही वोट की सुरक्षा जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि इस संदेश का असर दिख रहा है और लोग अब अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हो रहे हैं।
अरुण राजभर ने अंत में कहा कि वह किसी चुनावी एजेंडे के तहत नहीं, बल्कि बिना वोट मांगे सिर्फ जनता का दर्द सुनने गांव-गांव आ रहे हैं—और यही उनकी राजनीति का आधार है।
