आजमगढ़ जिले के सिधारी क्षेत्र में समाजसेवा और शिक्षा के क्षेत्र में एक बार फिर इंसानियत की खूबसूरत मिसाल देखने को मिली। समाजसेवी और शिक्षाविद ज़रीना खातून मदरसे के नन्हे-मुन्ने बच्चों के बीच पहुंचीं, जहां उनका स्वागत मासूम मुस्कानों और तालियों के साथ किया गया। ठंड के मौसम में ज़रीना खातून ने जरूरतमंद बच्चों को जैकेट्स वितरित कीं, वहीं बच्चों का हौसला बढ़ाने के लिए ट्रॉफियां और उपहार भी प्रदान किए।
कार्यक्रम के दौरान ज़रीना खातून ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वह यह सेवा कार्य बीते करीब 17 वर्षों से लगातार करती आ रही हैं। उन्होंने कहा कि यह काम उनके लिए कोई औपचारिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि दिल से जुड़ा हुआ फर्ज है। “जहां भी मुझे यह महसूस होता है कि बच्चे ठंड, भूख या पढ़ाई की कमी से जूझ रहे हैं, वहां पहुंचना मेरी खुशी बन जाता है,” उन्होंने कहा।
ज़रीना खातून ने भावुक शब्दों में कहा कि बच्चों की मुस्कान ही उनकी सबसे बड़ी कमाई है। उन्होंने अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए कहा कि अल्लाह ने उन्हें इस काबिल बनाया कि वह किसी के चेहरे पर खुशी ला सकें। उनके लिए बच्चे किसी धर्म, जाति या वर्ग के नहीं होते—हर बच्चा उनका अपना है।
सेवा कार्य की प्रेरणा के बारे में उन्होंने बताया कि यह जज़्बा उन्हें बचपन से मिला है। माता-पिता का साया कम उम्र में उठ जाने और खुद संघर्ष भरा जीवन देखने के कारण वह दूसरों के दर्द को बेहतर तरीके से समझ पाती हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि अच्छी तरबियत भी है, जो इंसान को बेहतर बनाती है। यही वजह है कि उनका पूरा जोर बच्चों की शिक्षा और संस्कारों पर है।
ज़रीना खातून ने बताया कि इसी उद्देश्य से वह मदरसा नूर फला और माहेनूर नर्सरी स्कूल का संचालन कर रही हैं, जहां बच्चों को पूरी तरह नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है। बच्चों की संख्या उनके लिए मायने नहीं रखती—चाहे एक बच्चा हो या सैकड़ों, सभी का स्वागत है।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों में खास उत्साह देखने को मिला। बच्चों ने कहा कि ज़रीना खातून के आने से उन्हें पढ़ाई के लिए नई ऊर्जा और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
अंत में ज़रीना खातून ने कहा कि उन्होंने अपने बच्चों को भी यह सीख दी है कि उनके बाद भी यह सेवा कार्य निरंतर चलता रहे। उन्होंने समाज से अपील की कि हर व्यक्ति शिक्षा और जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आए, ताकि कोई भी बच्चा अज्ञानता और अभाव के अंधेरे में न रहे।
