आजमगढ़ | 23 दिसंबर
आजमगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) की कार्यप्रणाली को लेकर अब पेशेवर इंजीनियरों और आर्किटेक्ट्स की संस्था ने भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रोफेशनल इंजीनियर्स एंड आर्किटेक्ट्स एसोसिएशन, आजमगढ़ ने एडीए सचिव को पत्र लिखकर प्राधिकरण की जटिल प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने की मांग की है।
एसोसिएशन ने अपने पत्र में स्पष्ट कहा है कि वर्तमान में एडीए की कार्यशैली के कारण आम जनता के साथ-साथ तकनीकी विशेषज्ञों को भी कई प्रकार की परेशानियों और अनावश्यक जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा है। संस्था ने इसे लोकहित से जुड़ा विषय बताते हुए तत्काल सुधार की आवश्यकता जताई है।
पत्र में कहा गया है कि स्वीकृत मानचित्र के बाद भी भवनों पर नोटिस जारी कर निर्माण कार्य रोक दिया जाता है, जबकि नियमों के अनुसार स्वीकृत मानचित्र के आधार पर कार्य निर्बाध रूप से होना चाहिए। इसके अलावा आवासीय मानचित्रों में फायर रिपोर्ट जैसी अनावश्यक शर्तों को हटाकर प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की गई है।
एसोसिएशन ने यह भी मांग उठाई है कि एडीए द्वारा प्रस्तुत नए बाइलॉज के संबंध में संस्था के साथ बैठक कर चर्चा की जाए, ताकि तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं का समाधान हो सके। इसके साथ ही प्राधिकरण में होने वाली बोर्ड बैठकों में एसोसिएशन के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग भी की गई है।
पत्र में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि भू-प्रयोग (लैंड यूज) से संबंधित कार्य अन्य प्राधिकरणों में जिस प्रणाली से संचालित हो रहे हैं, उन्हें एडीए में भी सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से लागू किया जाए। आरोप लगाया गया है कि विभागीय कार्यों के बावजूद कर्मचारियों द्वारा भू-प्रयोग की एनओसी के नाम पर अनावश्यक वसूली और देरी की जाती है।
इसके अलावा एसोसिएशन ने सवाल उठाया है कि अन्य विकास प्राधिकरणों की तुलना में आजमगढ़ विकास प्राधिकरण द्वारा अधिक शुल्क क्यों लिया जा रहा है, जबकि सुविधाएं अपेक्षाकृत कम हैं। साथ ही यह मांग भी की गई है कि लेबर सेस की धनराशि संबंधित विभाग द्वारा ही जमा कराई जाए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने पत्र के माध्यम से कहा है कि यदि एडीए वास्तव में लोकहित में कार्य करना चाहता है तो उसे अपनी नीतियों और प्रक्रियाओं में व्यावहारिक सुधार करना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्राधिकरण उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा।
यह पत्र प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर जगदीश प्रसाद सोनकर एवं प्रदेश महासचिव इंजीनियर राजेश सिंह द्वारा जारी किया गया है। इस पत्र के सामने आने के बाद एडीए की कार्यप्रणाली को लेकर बहस तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
