आज़मगढ़। जिले की जहानागंज थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने साइबर ठगी के बड़े गिरोह का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी यूपी कॉप ऐप के माध्यम से मुकदमों की कॉपी डाउनलोड कर पीड़ितों को डरा-धमकाकर हजारों रुपये ऐंठते थे। पुलिस ने इनके कब्जे से फर्जी आधार कार्ड, सिम कार्ड, दो मोबाइल फोन और पुलिस का फर्जी परिचय पत्र बरामद किया है। इस पूरे प्रकरण का खुलासा पुलिस लाइन में एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने किया।
मामला 25 नवंबर 2025 का है, जब जहानागंज की रहने वाली सविता देवी ने पुलिस को शिकायत दी। पीड़िता ने बताया कि एक कॉल करने वाले ने स्वयं को पुलिस का सिपाही रंजीत बताते हुए कहा कि आपकी खोई हुई बेटी मिल गई है, उसे लेने जा रहे हैं। जल्दी QR कोड पर ₹24,000 भेजें। इस पर भरोसा करते हुए महिला ने ₹22,000 भेज दिए। इसके बाद कॉलर ने मोबाइल बंद कर दिया और बेटी की कोई सूचना नहीं मिली। इस पर जहानागंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।
मुकदमा दर्ज होने के बाद थाना प्रभारी अतुल कुमार मिश्रा ने सर्विलांस और साइबर टीम की मदद से छानबीन शुरू की। तकनीकी जांच के दौरान मध्य प्रदेश निवासी दो युवक—अंकित यादव और दीनदयाल यादव—पुलिस की पकड़ में आ गए।
एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि दोनों आरोपी पीड़ितों को गिरफ्तारी और मुकदमे में फंसाने का भय दिखाकर ₹2000 से ₹20000 तक की ठगी करते थे। इनके खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं। आरोपी यूपी कॉप ऐप से मुकदमे की कॉपी डाउनलोड कर पीड़ितों की जानकारी जुटाते थे। फिर गूगल और निर्वाचन आयोग की वेबसाइट से ग्राम प्रधान या पीड़ित के संपर्क नंबर हासिल कर लेते थे। इसके बाद फोन कर गिरफ्तारी से बचाने का झांसा देते और QR कोड भेजकर पैसा वसूलते थे।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कई जिलों में साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम दे चुके थे। अंकित यादव के मोबाइल से आजमगढ़, अमरोहा, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, तमिलनाडु, बाराबंकी, बुलंदशहर, भदोही, मथुरा, हरदोई और हैदराबाद सहित कई जिलों के मुकदमों की सूची मिली है।
इस संयुक्त कार्रवाई में साइबर सेल के सब इंस्पेक्टर सागर कुमार रंगू, ओम प्रकाश जायसवाल, राहुल सिंह सहित पुलिस और साइबर टीम के कई सदस्य शामिल रहे। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि इनके साथ और कौन लोग जुड़े हैं तथा अब तक कितने लोगों को यह अपनी ठगी का शिकार बना चुके हैं।
