नई दिल्ली :- लोकसभा में लगातार तीसरे दिन भी आजमगढ़ सांसद धर्मेंद्र यादव ने जनहित से जुड़े मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। शुक्रवार को उन्होंने सदन में उन लाखों संविदा कर्मियों की वास्तविक स्थिति और उनके संघर्ष को प्रमुखता से रखते हुए सरकार से तुरंत ठोस कदम उठाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि देश की व्यवस्था ऐसे ही कर्मचारियों के कंधों पर टिकी है—चाहे वे शिक्षामित्र हों, अनुदेशक हों, रोजगार सेवक हों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हों, पंचायत कर्मी हों या फिर स्कूलों में कार्यरत रसोइए। ये वह लोग हैं जो समाज के अंतिम छोर तक सरकारी योजनाओं और शिक्षा व्यवस्था को पहुंचाते हैं, लेकिन स्वयं असुरक्षा और आर्थिक तंगी से जूझते रहते हैं।
सांसद ने बताया कि मामूली मानदेय, नौकरी में स्थायित्व की कमी, बीमा और स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव के चलते इन कर्मियों और उनके परिवारों को हर दिन अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई जगहों पर ठेकेदारों द्वारा शोषण की शिकायतें भी आम हैं, जिससे उनका जीवन और अधिक असुरक्षित हो जाता है।
धर्मेंद्र यादव ने स्पष्ट रूप से कहा कि अब समय आ गया है कि सरकार इन सेवाओं में लगे सभी कर्मियों को स्थायी रोजगार देने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए। उन्होंने स्वास्थ्य सुरक्षा, बीमा, पेंशन सहित उनके लिए सम्मानजनक कार्य स्थितियों की गारंटी सुनिश्चित करने की भी जोरदार मांग उठाई।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ नीतिगत सवाल नहीं है, बल्कि उन परिवारों के भविष्य और सम्मान का सवाल है, जो पूरी निष्ठा और समर्पण से राष्ट्र की सेवा में लगे हुए हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद ने आश्वासन दिया कि आदरणीय अखिलेश यादव के नेतृत्व में पार्टी सड़क से संसद तक इन कर्मचारियों की आवाज़ बनेगी।
उन्होंने कहा, “जब तक इनका हक़ और न्याय सुनिश्चित नहीं हो जाता, हमारी यह लड़ाई जारी रहेगी।”
सांसद धर्मेंद्र यादव के इस उठाए गए मुद्दे का सदन में बैठे विपक्षी सदस्यों ने भी समर्थन किया और सरकार से इस दिशा में सकारात्मक पहल करने की माँग की।
इस मुद्दे के उठने से देशभर के संविदा, शिक्षामित्र, आंगनवाड़ी एवं अन्य अस्थायी कर्मचारी वर्ग में उम्मीद की नई किरण दिखी है, जो लंबे समय से अपने हक और सम्मानजनक भविष्य के लिए संघर्षरत हैं।
