नई दिल्ली/आज़मगढ़। लोकसभा के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को आज़मगढ़ के सांसद धर्मेंद्र यादव ने उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों और देशों में फैले कथित “नकली कफ सिरप रैकेट” का बड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने सभापति का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि यह सिर्फ गैरकानूनी कारोबार नहीं, बल्कि मासूम बच्चों की जान लेने वाला संगठित अपराध है, जिसकी जड़ें पूर्वांचल में गहराई से फैली हैं।
सांसद ने आरोप लगाया कि यह नेटवर्क बनारस, जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर, आज़मगढ़ और भदोही जैसे जिलों में सक्रिय है, जहां से नकली कफ सिरप की सप्लाई उत्तर प्रदेश से बाहर बिहार, बंगाल, झारखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान तक फैलाई जाती है। इतना ही नहीं, यह व्यापार देश की सीमाओं को पार करते हुए बांग्लादेश और साउथ अफ्रीका तक फैल चुका है। उनके अनुसार इस घातक कारोबार के चलते अब तक सैकड़ों बच्चों की मौत हो चुकी है।
उन्होंने एक ताज़ा उदाहरण रखते हुए बताया कि बनारस सेंट्रल वॉर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राजा आनंद ज्योति सिंह की मौत भी इसी नकली कफ सिरप के सेवन से हुई थी। उनकी पत्नी भारती सिंह ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की भरसक कोशिश की, लेकिन लगभग एक साल तक उनकी सुनवाई नहीं हुई। धर्मेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि पुलिस बार-बार टालती रही और यह मामला दबा दिया गया। बाद में जब मीडिया में यह खबर सामने आई और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस सहित विभिन्न माध्यमों से मुद्दा उठाया, तब जाकर पुलिस हरकत में आई।
धर्मेंद्र यादव ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि जिस बनारस को प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने का गौरव प्राप्त है और जहां मुख्यमंत्री भी महीने में कई बार दौरा करते हैं, वहीं एक जाति विशेष के माफिया खुलेआम 2000 करोड़ रुपए से ज्यादा का अवैध व्यापार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यापार सिर्फ मुनाफे के लिए है, इंसानी जान की कीमत इन माफियाओं के लिए कुछ नहीं। “बच्चे मरें या बुजुर्ग, इन्हें फर्क नहीं पड़ता,” उन्होंने भावुक होकर कहा।
उन्होंने यह भी दावा किया कि इस नेटवर्क ने पूर्वांचल के कई जिलों में प्रभावशाली अपराधियों को करोड़ों की लग्जरी कारों तक गिफ्ट की हैं, जिनका कोई टैक्स रिकॉर्ड नहीं है। उन्होंने कहा कि चाहें तो वह सदन में इनके नाम और गाड़ियों के मॉडल तक बता सकते हैं।
सभापति को संबोधित करते हुए धर्मेंद्र यादव ने कहा, “आप एक महिला हैं, मां हैं, बच्चों के दर्द को समझ सकती हैं। सोचिए कितने परिवारों पर क्या बीत रही होगी जब उनके मासूम बच्चे जहरीली दवा की वजह से मर रहे हैं।”
सांसद ने केंद्र सरकार और मंत्रीमंडल से इस पूरे रैकेट की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि उनके संसदीय क्षेत्र में चल रही इस भयावह अवैध गतिविधि पर तुरंत रोक लगाई जाए, ताकि प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान न पहुंचे और भविष्य में कोई और मासूम ऐसी मौत का शिकार न हो।
