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1994 से इंसाफ की लड़ाई… अब आजमगढ़ में वजते इस्लामी का बड़ा आयोजन

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आजमगढ़: संगठन ‘वहदते इस्लामी हिन्द ’ ने आत्मशुद्धि व सामाजिक सद्भाव पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया, मानव गरिमा व इंसाफ को लेकर दिया मजबूत संदेश
आजमगढ़ में रविवार को समाज में बराबरी, भाईचारे और इंसानियत की रक्षा के उद्देश्य से संगठन ‘वहदते इस्लामी हिन्द ’ द्वारा एक विशेष प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में संगठन के प्रमुख सदस्यों, विभिन्न धर्मों के बुद्धिजीवियों, शिक्षकों, डॉक्टरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में तकरीबन 40 नॉन मुस्लिम भाई ने भी मौजूदगी दर्ज कराई, जो देश में मोहब्बत और आपसी सम्मान का एक सकारात्मक संदेश देता है।

कार्यक्रम के दौरान संगठन के सक्रिय सदस्य मोहम्मद जमील सिद्दीकी ने बताया कि वहदते इस्लामी हिन्द की स्थापना वर्ष 1994 में की गई थी और तब से संगठन मानव मूल्यों, सामाजिक न्याय और इंसानियत की रक्षा हेतु अलग-अलग अभियानों का संचालन कर रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में संगठन ने ‘मानव गरिमा – हम इंसानों की इज्जत कैसे बचा सकते हैं’ अभियान पूरे देश में चलाया था, जिसे न सिर्फ मुस्लिम समाज बल्कि अन्य धर्मों के लोगों ने भी सराहा था। महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में आयोजित कार्यक्रमों में विभिन्न समुदायों के लोगों ने एक साथ मिलकर मानवता की आवाज बुलंद की थी।

उन्होंने कहा कि हाल ही में उत्तर प्रदेश में संगठन द्वारा पूरे रबीउल अव्वल माह में ‘सामाजी इंसाफ और हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का आदर्श’ विषय पर व्यापक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके तहत एक बुकलेट भी प्रकाशित की गई है, जिसमें बताया गया है कि समाज में न्याय और समानता न होने पर कोई भी समुदाय खुशहाल नहीं रह सकता।

जमील सिद्दीकी ने कहा—“इंसान इंसान के रूप में बराबर है। किसी को जाति या बिरादरी के आधार पर नीचा या ऊंचा नहीं समझा जा सकता। अल्लाह की नजर में वही बेहतर है जो अच्छे काम करे, दूसरों की मदद करे और बुराइयों से बचे।”

उन्होंने इंसाफ की अहमियत पर भी जोर दिया और कहा कि यदि समाज में अत्याचार, भेदभाव और शोषण होगा तो अमन और सुकून संभव नहीं। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि मानव गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली घटनाओं पर संगठन ने हमेशा आवाज उठाई है।

कार्यक्रम में शामिल विभिन्न धर्मों के वक्ताओं ने भी बराबरी, प्रेम और पारस्परिक सहयोग को बढ़ावा देने की बात कही। जमील सिद्दीकी ने कहा कि इस्लाम का पैगाम सिर्फ मुसलमानों के लिए नहीं बल्कि पूरी इंसानियत के लिए है। नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने दुनिया को गुलामी से मुक्त कराया, इंसाफ का पैगाम दिया और हर आदमी को उसकी इज्जत दिलाने का काम किया।

अंत में उन्होंने कहा—“अज्ञानता नफरत को जन्म देती है। हमें एक-दूसरे को समझने की जरूरत है। मिलकर काम करेंगे तो समाज में मोहब्बत, अमन और बराबरी कायम होगी।”

कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने सामाजिक सद्भाव और इंसाफ के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया।

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