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आजमगढ़ : सपा सांसद धर्मेन्द्र यादव ने मतदाता सूची में अनियमितताओं को लेकर जिलाधिकारी से की मुलाकात

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आजमगढ़ में वृहस्पतिवार को सियासी तापमान उस समय और बढ़ गया, जब सपा सांसद धर्मेन्द्र यादव ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर एसआईआर (Special Revision of Electoral Roll) प्रक्रिया में हो रही अनियमितताओं पर गंभीर सवाल खड़े किए। सांसद ने कहा कि उनकी पार्टी लगातार मैदान में सक्रिय है और विभिन्न इलाकों से मतदाताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई परिवारों में मतदाताओं की संख्या के अनुरूप फॉर्म नहीं बांटे जा रहे हैं, जबकि आयोग ने प्रत्येक मतदाता को दो फॉर्म देने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। कई बीएलओ पर पक्षपात एवं भेदभाव के आरोप भी लगाए गए।
धर्मेन्द्र यादव ने कहा कि उन्होंने जिलाधिकारी के सामने सभी शिकायतें रखीं हैं और उम्मीद जताई कि 9 दिसंबर को आने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची में मौजूदा मतदाता सूची के आंकड़े बिना कटौती के शामिल किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि “किसी मतदाता का वोट जबरन काटा न जाए, तकनीकी कारणों का हवाला देकर परेशान न किया जाए। लोकतंत्र का सबसे बड़ा हथियार वोट है, और हर मतदाता को अपना नाम दुरुस्त कराना चाहिए।”
मीडिया द्वारा बिहार चुनाव और भाजपा नेताओं की टिप्पणियों पर सवाल पूछे जाने पर धर्मेन्द्र यादव ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रोपेगेंडा और सत्ता के दुरुपयोग के जरिए चुनाव जीतने की कोशिश करती है, जबकि सपा जनता की समस्याओं के समाधान और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर चुनाव लड़ती है। उन्होंने कहा कि “निष्पक्ष चुनाव हो तो भाजपा उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के सामने टिक ही नहीं सकती।”
इंडिया टुडे की रिपोर्ट में मुलायम सिंह यादव को लेकर विवादित प्रस्तुति पर उन्होंने कड़ा विरोध जताया और कहा कि यह “परम विभूषण” से सम्मानित और देश के करोड़ों लोगों के प्रिय नेता का अपमान है। उन्होंने संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर सपा इसका व्यापक बहिष्कार भी कर सकती है।
ईवीएम और वोट चोरी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सपा पूरी तरह सजग है। पीडीए प्रहरियों की नियुक्ति हो चुकी है और प्रत्येक विधानसभा में टीम सक्रिय है। उन्होंने दावा किया कि आजमगढ़ की जनता ने पिछली बार 1100 रेड कार्ड बांटे जाने के बावजूद सपा को दो-दो सांसद जिताकर यह साबित किया कि जनता के सामने सरकार की हर चाल कमजोर पड़ जाती है।
धर्मेन्द्र यादव ने अंत में अपील की कि मतदाता अपना नाम सुनिश्चित करें और 2027 के चुनाव को “लोकतंत्र व संविधान बचाने की लड़ाई” के रूप में देखें।

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