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आजमगढ़ में “नए भारत की राजनीति में राष्ट्रवाद और असहमति” पर युवाओं ने रखे विचार

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मेहता पार्क में हुई विचार गोष्ठी — “नए भारत की राजनीति में राष्ट्रवाद और असहमति” पर युवाओं ने रखे विचार

आजमगढ़। शहर के ऐतिहासिक मेहता पार्क में गुरुवार को “नए भारत की राजनीति में राष्ट्रवाद और असहमति” विषय पर एक प्रेरक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह गोष्ठी युवा चिंतक दिव्यशक्ति कुमार गौतम के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं, विद्यार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर लोकतंत्र, राष्ट्रवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे अहम मुद्दों पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का संचालन सामयिक विमर्शकार सत्यम प्रजापति ने किया। उन्होंने अपने उद्घाटन वक्तव्य में कहा कि “नए भारत” की परिकल्पना केवल आर्थिक विकास या राजनीतिक परिवर्तन से पूरी नहीं होती, बल्कि विचारों की विविधता और असहमति को सम्मान देने से ही लोकतंत्र जीवित रह सकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद का अर्थ किसी वर्ग या विचारधारा का प्रभुत्व नहीं, बल्कि हर नागरिक में देश के प्रति समान जिम्मेदारी और प्रेम की भावना जगाना है।
वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रवाद किसी देश की आत्मा होता है, लेकिन जब राष्ट्रवाद का दायरा सीमित कर दिया जाता है और असहमति को देशद्रोह बताया जाने लगता है, तब लोकतंत्र कमजोर पड़ने लगता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि असहमति लोकतंत्र की सेहत का संकेत है — जहां असहमति नहीं, वहां संवाद और सुधार की गुंजाइश भी नहीं रहती।


गोष्ठी में उपस्थित युवाओं ने अपनी बेबाक राय रखते हुए कहा कि आज के दौर में युवाओं को सोशल मीडिया और राजनैतिक मंचों पर अपनी बात रखने से डरने की नहीं, बल्कि सच्चाई कहने की हिम्मत रखने की जरूरत है। कई वक्ताओं ने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे विचारों की विविधता से ही भारत की पहचान बनी है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत भी है।
कार्यक्रम में शिब्ली नेशनल कॉलेज के विद्यार्थी — सुखविंदर यादव, आदित्य, अखिल, अनिल चौरसिया, आलोक कुमार गौतम, अविनाश यादव, हरिकेश चौबे, अंकित यादव और सौरभ मौर्य ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इसके अलावा पूर्वांचल किसान यूनियन के वरिष्ठ नेता राजीव यादव, वीरेंद्र यादव और अवधेश यादव ने भी राष्ट्रवाद के सामाजिक दृष्टिकोण और किसानों की भूमिका पर अपने विचार रखे।
चर्चा के दौरान युवाओं ने आजमगढ़ में जल्द ही “युवा छात्र संसद” आयोजित करने का प्रस्ताव भी रखा, जिससे विद्यार्थियों और युवाओं को राजनीति में जागरूकता के साथ भागीदारी का अवसर मिले। वक्ताओं ने कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं में संवाद और नेतृत्व क्षमता को विकसित करते हैं, जो लोकतांत्रिक समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंत में दिव्यशक्ति कुमार गौतम ने सभी उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि “राष्ट्रवाद और असहमति दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। जहां राष्ट्रवाद हमें जोड़ता है, वहीं असहमति हमें सुधारने की दिशा दिखाती है।” उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आजमगढ़ में इस तरह के और भी विमर्श आयोजित किए जाएंगे ताकि युवाओं में संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना विकसित हो सके।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। उपस्थित सभी युवाओं ने एक स्वर में कहा — “विचारों की विविधता ही लोकतंत्र की सच्ची पहचान है।”

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