Breaking News

आजमगढ़ के लाल ने किया कमाल …(IES)–2024 में सिविल इंजीनियरिंग में हासिल की 11वीं रैंक…

Spread the love

संघर्ष से सफलता तक : शिवम श्रीवास्तव की प्रेरक कहानी

सपनों को हकीकत बनाने के लिए सिर्फ़ मेहनत ही नहीं, बल्कि धैर्य, लगन और आत्मविश्वास की भी आवश्यकता होती है। बूढ़नपुर तहसील के ग्राम खोन्हनपुर निवासी शिवम श्रीवास्तव ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा (IES)–2024 में सिविल इंजीनियरिंग में 11वीं रैंक प्राप्त कर शिवम ने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गाँव और क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

शिवम एक ऐसे परिवार से आते हैं जहाँ अनुशासन और शिक्षा का वातावरण हमेशा प्राथमिकता में रहा। उनके पिता श्री सुवास श्रीवास्तव दीवानी कचहरी से सेवानिवृत्त हैं, जबकि उनकी माँ स्व. सुधा श्रीवास्तव अध्यापिका पद से सेवानिवृत्त रहीं। माँ की शिक्षिका वाली सोच और पिता के कड़े अनुशासन ने शिवम के व्यक्तित्व को निखारा। यही संस्कार आज उनकी इस उपलब्धि के पीछे सबसे बड़ी ताक़त बने।

गाँव के लोग बताते हैं कि बचपन से ही शिवम पढ़ाई के प्रति गंभीर और जिज्ञासु रहे। कठिन विषयों को भी धैर्यपूर्वक समझने की उनकी आदत उन्हें बाकी बच्चों से अलग बनाती थी। स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई के दौरान भी उन्होंने हमेशा बेहतर प्रदर्शन किया और खुद को निरंतर नए लक्ष्य की ओर अग्रसर रखा।

इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा (IES) भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। इस परीक्षा में सफलता पाने के लिए गहरी समझ, कठिन परिश्रम और निरंतर अभ्यास की आवश्यकता होती है। शिवम ने इस चुनौती को पूरी दृढ़ता से स्वीकार किया।

कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार मानना नहीं सीखा। देर रात तक पढ़ाई करना, आत्म-अनुशासन बनाए रखना और खुद पर भरोसा करना उनकी सबसे बड़ी पूँजी रही। उन्होंने दिखा दिया कि सफलता एक ही प्रयास का परिणाम नहीं होती, बल्कि लगातार किए गए प्रयासों का प्रतिफल होती है।

शिवम की इस उपलब्धि से उनके पिता श्री सुवास श्रीवास्तव, चाचा श्री श्रीनाथ लाल श्रीवास्तव और श्री अशोक लाल श्रीवास्तव बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं। पूरे गाँव में खुशी का माहौल है। हर कोई शिवम को बधाई दे रहा है और बच्चे उनसे प्रेरणा ले रहे हैं। गाँव के बुजुर्ग कहते हैं कि शिवम ने यह साबित कर दिया कि ग्रामीण परिवेश में रहकर भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं, बस ज़रूरत है मेहनत और हिम्मत की।

शिवम की सफलता की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो सपने देखता है और उन्हें पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है। उनकी कहानी यह सिखाती है कि—

  • कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं।

  • असफलता सिर्फ़ सफलता की सीढ़ी है।

  • परिवार के संस्कार और आत्मविश्वास सबसे बड़ी ताक़त हैं।

शिवम श्रीवास्तव की यह उपलब्धि सिर्फ़ व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए संदेश है कि अगर लक्ष्य ऊँचे हों और प्रयास ईमानदारी से किए जाएँ, तो कोई भी बाधा रोक नहीं सकती। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि छोटे गाँव से निकलकर भी बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं।

आज खोन्हनपुर ही नहीं, पूरा आज़मगढ़ उनके इस गौरवशाली क्षण पर गर्व कर रहा है। शिवम की यह प्रेरक यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनी रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Social media & sharing icons powered by UltimatelySocial