आज़मगढ़ :- कहते हैं कि – “एक शिक्षित व्यक्ति ही शिक्षा का असली महत्त्व समझ सकता है।” और जब कोई इंसान इस महत्त्व को समझकर ठोस कदम उठाता है, तो उसका असर केवल एक बच्चे या परिवार तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा समाज प्रेरणा की राह पकड़ लेता है। शिक्षा ही वह दीपक है, जो अज्ञान के अंधेरे को चीरकर उजाला फैलाता है। आज़मगढ़ ज़िले का एक गाँव आज इसी बदलाव की मिसाल पेश कर रहा है।
गाँव का बदलता चेहरा
अजमतगढ़ ब्लॉक के बासुपार बनकट गाँव का प्राथमिक विद्यालय कभी साधारण स्कूल हुआ करता था। मिट्टी की दीवारें, जर्जर क्लासरूम और सीमित संसाधन यहाँ की पहचान थे। लेकिन आज वही स्कूल पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन चुका है। साफ-सुथरे कक्ष, आधुनिक भोजनालय, समृद्ध पुस्तकालय, बच्चों के हाथों में लैपटॉप और इंटरनेट से जुड़ी वाई-फ़ाई सुविधा—यह सब किसी शहर के निजी विद्यालय की तस्वीर पेश करता है।
इस बदलाव के पीछे गाँव के शिक्षित और दूरदर्शी प्रधान प्रतिनिधि अब्दुल वहाब की सोच और मेहनत है। उन्होंने साबित कर दिया कि यदि जनप्रतिनिधि में विज़न हो, तो गाँव का प्राथमिक विद्यालय भी ग्लोबल स्टैंडर्ड का बन सकता है।
प्रेरणा बने डॉ. अमित सिंह
इसी विद्यालय का दौरा किया रामा मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर और समाजसेवी डॉ. अमित सिंह ने। बच्चों के लिए उनका यह दौरा किसी उत्सव से कम नहीं रहा।
डॉ. सिंह ने सबसे पहले विद्यालय के भोजनालय का निरीक्षण किया और फिर सभी कक्षाओं में जाकर बच्चों से बातचीत की। जब वे पुस्तकालय पहुँचे तो वहाँ का नज़ारा देखकर वे चकित रह गए। नन्हें-नन्हें बच्चे लैपटॉप पर टाइपिंग और पेंटिंग करते दिखाई दिए। अलमारियों में सजी महापुरुषों की जीवनी और सभी धर्मों की किताबें देखकर उनके चेहरे पर संतोष की चमक आ गई।
बच्चों के लिए बड़ा ऐलान
निरीक्षण के दौरान उन्होंने महसूस किया कि बच्चों के लिए अभी स्मार्ट क्लास की सुविधा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बिना कोई देर किए घोषणा की –
“मैं अपनी ओर से बच्चों को स्मार्ट क्लास उपलब्ध कराऊँगा, ताकि गाँव का बच्चा भी वही सीखे, जो शहर के बड़े विद्यालयों में पढ़ाया जाता है।”
यह सुनकर बच्चे, अध्यापक और ग्रामीण ख़ुशी से झूम उठे। यह घोषणा सिर्फ़ बच्चों के भविष्य ही नहीं, बल्कि पूरे गाँव के लिए उम्मीद की किरण थी।
उपहार और मिठाइयाँ लेकर पहुँचे
डॉ. अमित सिंह केवल घोषणा करके नहीं रुके, बल्कि अपने साथ बच्चों के लिए ढेर सारे उपहार भी लाए थे—कॉपी, पेन, पेंसिल, रबर और मिठाइयाँ। उन्होंने स्वयं अपने हाथों से बच्चों को मिठाई खिलाई। बच्चों की चमकती आँखें और खिलखिलाती मुस्कान इस बात का प्रमाण थी कि वे अपने जीवन का अविस्मरणीय पल जी रहे हैं। वहीं अध्यापक और ग्रामीण भी इस दृश्य को देखकर गद्गद हो उठे।
शिक्षा की अलख
प्रधान प्रतिनिधि अब्दुल वहाब ने इस विद्यालय की नींव बदली और अब समाजसेवी डॉ. अमित सिंह ने इसमें नई ऊर्जा का संचार कर दिया है। आज यह विद्यालय इस बात का जीवंत उदाहरण है कि गाँव-गाँव में शिक्षा का दीपक कैसे जलाया जा सकता है।
यह वही छोटे-छोटे प्रयास हैं, जो आगे चलकर बड़े बदलाव की नींव रखते हैं। बासुपार बनकट का विद्यालय आज पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन गया है और यह संदेश दे रहा है कि –
“अगर शिक्षा की अलख जलाने का संकल्प हो, तो गाँव का बच्चा भी लैपटॉप पर सपनों की उड़ान भर सकता है।”
राजनीतिक संभावनाओं का संकेत
बता दें कि डॉ. अमित सिंह सगड़ी विधानसभा में अपनी राजनीतिक संभावनाएँ तलाश रहे हैं। उनका यह प्रयास केवल समाजसेवा ही नहीं, बल्कि राजनीति के नए आयामों को भी दर्शाता है। बच्चों के मन में यह विश्वास जगाना कि—“कोई तो है, जो हमें देख रहा है, हमारी परवाह करता है,”—अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है।
शिक्षा वह आधार है, जिस पर समाज की सुदृढ़ इमारत खड़ी होती है। बासुपार बनकट गाँव का यह विद्यालय आज प्रेरणा का केंद्र बन गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस प्रयास से न केवल गाँव, बल्कि पूरे ज़िले के अन्य विद्यालय भी कैसे प्रेरणा लेकर शिक्षा की ज्योति को और प्रज्वलित करते हैं।
