आजमगढ़। उत्तर प्रदेश में बंद किए जा रहे सरकारी प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों को लेकर समाजवादी पार्टी ने योगी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। लोकसभा में सपा के मुख्य सचेतक व आजमगढ़ सांसद धर्मेंद्र यादव ने इसे गरीब, पिछड़े और दलित समाज के बच्चों की शिक्षा से वंचित करने की साज़िश बताया है।
धर्मेंद्र यादव ने कहा कि सरकार एक सोची-समझी रणनीति के तहत उन सरकारी स्कूलों को बंद कर रही है, जिनमें बड़ी संख्या में गरीब, दलित, पिछड़े और निम्न आय वर्ग के बच्चे पढ़ते हैं। उन्होंने इस कदम को मनुवादी सोच से प्रेरित बताते हुए कहा कि भाजपा सरकार एक बार फिर वही व्यवस्था लागू करना चाहती है जिसमें शिक्षा केवल ऊंचे वर्गों तक सीमित रहे और वंचित वर्गों को अंधकार में रखा जाए।
सांसद ने जिलाधिकारी आजमगढ़ को पत्र लिखकर इस आदेश से प्रभावित विद्यार्थियों और कर्मचारियों से जुड़ी 7 बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी मांगी है।
सांसद ने ये मांगी जानकारी:
-
इस निर्णय से प्रभावित विद्यार्थियों का वर्गीकरण – निम्न, मध्यम और उच्च आय वर्ग के आधार पर।
-
जातिगत आधार पर विवरण – अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के प्रभावित छात्रों की संख्या।
-
कुल प्रभावित बच्चों की ग्रामवार और ब्लॉकवार सूची।
-
बंद विद्यालयों के बाद वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था की क्या योजना है।
-
क्या अभिभावकों से इस निर्णय पर लिखित सहमति या आपत्ति ली गई है, यदि हां तो उसकी प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं।
-
जिन विद्यालयों को मर्ज किया गया है, वहां के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की नई नियुक्ति की सूची।
-
चतुर्थ श्रेणी कर्मियों में से कितने लोग ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर तैनात किए गए हैं, उनकी सूची।
धर्मेंद्र यादव ने कहा कि अगर सरकार ने जल्द इन सवालों के जवाब नहीं दिए और गरीब बच्चों की शिक्षा बाधित हुई तो सपा पूरे प्रदेश में आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि यह केवल स्कूलों को बंद करने का मामला नहीं है, बल्कि एक पूरे वर्ग की आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को अंधकार में ढकेलने का षड्यंत्र है।
