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शिक्षा की लौ से रोशन हुआ आज़मगढ़ का जहानगंज: SKD विद्या मंदिर बना सफलता की मिसाल…

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  • शिक्षा की लौ से रोशन हुआ आज़मगढ़ का जहानगंज: SKD विद्या मंदिर बना सफलता की मिसाल…
    जहानगंज आज़मगढ़ (उत्तर प्रदेश) – कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और मन में जुनून हो, तो कोई भी सपना हकीकत बन सकता है। ऐसी ही एक मिसाल पेश की है जहानगंज ब्लॉक के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले विजय बहादुर सिंह ने, जिन्होंने शिक्षा को अपना हथियार बनाया और क्षेत्र की तस्वीर ही बदल दी।

विजय बहादुर सिंह का सपना सिर्फ एक स्कूल खोलने तक सीमित नहीं था, उनका सपना था – अपने गांव और आसपास के क्षेत्र के हर बच्चे को बेहतर शिक्षा देना, ताकि वे भी देश और दुनिया में अपनी पहचान बना सकें। इसी सोच के साथ उन्होंने SKD इंटर कॉलेज की नींव रखी, और फिर क्रमशः SKD विद्यामंदिर और SKD रेजिडेंशियल एकेडमी जैसे शिक्षण संस्थानों की शुरुआत की, जहाँ आज JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की भी तैयारी कराई जाती है।

  • छात्रों की सफलता बनी प्रेरणा
    इस साल SKD विद्यामंदिर ने जो बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे दिए हैं, वे खुद में एक मिसाल हैं। कक्षा 10वीं के छात्र मिथिलेश यादव ने 98% अंक प्राप्त कर जिले में दूसरा स्थान हासिल किया। वहीं 12वीं के छात्र अंकुर सिंह ने जिले के टॉप 10 में अपना नाम दर्ज कराते हुए स्कूल टॉपर का खिताब अपने नाम किया। खास बात यह रही कि अंकुर पहले भी कक्षा 10वीं में जिले के टॉप 5 में आ चुके हैं और अब उन्होंने JEE Mains में 99.83 परसेंटाइल अर्जित कर अपने सुनहरे भविष्य की ओर कदम बढ़ा दिए हैं।

अंकुर का सपना है कि वे IIT से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके देश की सेवा करें। उन्होंने कहा, “मुझे अपने गांव, अपने स्कूल और अपने गुरुजनों पर गर्व है, जिन्होंने मुझे इस मुकाम तक पहुँचने में मदद की।”

  • सफलताओं की श्रृंखला
    बोर्ड परीक्षा में अन्य छात्रों ने भी शानदार प्रदर्शन किया।
    मिथिलेश यादव (10वीं) – 98%

विपुल यादव (10वीं) – 95.5%

आंचल वर्मा (10वीं) – 95.4%

नीकिता यादव – 92%

प्रांजल – 91%

वहीं 12वीं के परिणाम भी प्रेरणादायक रहे:

अंकुर सिंह – 95% (प्रथम)

आयुषी सिंह – 87.8% (द्वितीय)

अखिलेश यादव – 86% (तृतीय)

आलोक यादव – 85%

कुल मिलाकर कक्षा 12 के 44 छात्रों ने उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की, जो इस बात का प्रमाण है कि SKD विद्यामंदिर एक सामान्य स्कूल नहीं, बल्कि एक शिक्षा मंदिर बन चुका है।

  • संघर्ष से सृजन तक – विजय बहादुर सिंह की कहानी
    संस्थापक विजय बहादुर सिंह ने इस अवसर पर कहा, “शिक्षा सिर्फ अंकों का खेल नहीं होती। हमारा प्रयास है कि बच्चों का सर्वांगीण विकास हो, जिससे वे अच्छे नागरिक बनें।” उन्होंने बताया कि उन्होंने जब SKD स्कूल की नींव रखी थी, तब संसाधन कम थे, लेकिन इरादा और सपना बड़ा था। आज यह सपना हकीकत बन रहा है।

उनका कहना है, “हमारे यहां के बच्चे अब दिल्ली, मुंबई या लखनऊ के बच्चों से किसी भी मामले में कम नहीं हैं। हम उन्हें सिर्फ किताबें नहीं पढ़ाते, बल्कि जिंदगी की समझ भी देते हैं।”

  • बच्चों के उत्साह का उत्सव
    विद्यालय परिवार ने बच्चों की इस सफलता को बड़े ही उत्साहपूर्वक मनाया। एक खास कार्यक्रम का आयोजन कर टॉपर छात्रों को चमचमाती ट्रॉफियां दी गईं और उनका उत्साह बढ़ाया गया। छात्र-छात्राओं ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और स्कूल के माहौल को दिया।

इस मौके पर 10वीं की छात्रा आंचल वर्मा ने कहा, “हमारे स्कूल में हमें सिर्फ परीक्षा पास कराने की नहीं, बल्कि जीवन में सफल होने की शिक्षा दी जाती है।” वहीं 10वीं के टॉपर मिथिलेश यादव ने कहा, “हम भाग्यशाली हैं कि हमें SKD जैसा स्कूल मिला।”

  • प्रशासनिक सराहना भी मिली
    छात्रों की सफलता से प्रभावित होकर ब्लॉक प्रमुख रमेश कन्नौजिया स्वयं विद्यालय पहुंचे और बच्चों को आशीर्वाद व शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा, “SKD विद्यालय ने ग्रामीण शिक्षा को नई ऊँचाई दी है। विजय बहादुर सिंह ने जो शिक्षा की लौ जलाई है, वह अब पूरे क्षेत्र को रोशन कर रही है।”
  • SKD: शिक्षा का भविष्य
    SKD विद्यामंदिर और रेजिडेंशियल एकेडमी अब न सिर्फ स्कूल बन चुके हैं, बल्कि वे एक ऐसा मंच बन गए हैं, जहाँ से बच्चों के सपनों को पंख मिलते हैं। विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रीती यादव, शिक्षक श्रीकांत सिंह, संजय पटेल, आनंद, राजेश, रंजना, राकेश, ममता, सतीश, प्रदीप सहित अन्य सभी शिक्षकगण इस सफलता के पीछे की मजबूत नींव हैं।

विद्यालय में स्मार्ट क्लास, लाइब्रेरी, विज्ञान प्रयोगशाला, खेलकूद की सुविधाएँ और करियर गाइडेंस जैसी व्यवस्थाएँ छात्रों को शहरों जैसी शिक्षा देने में मदद कर रही हैं।

  • अंत में…
    SKD विद्यालय की यह कहानी साबित करती है कि अगर किसी क्षेत्र में एक व्यक्ति शिक्षा को मिशन बना ले, तो बदलाव अवश्य आता है। विजय बहादुर सिंह और उनके विद्यालय ने यह साबित कर दिया है कि “जहाँ चाह, वहाँ राह” सिर्फ कहावत नहीं, बल्कि सच्चाई है।

आज SKD के छात्र सिर्फ परीक्षा पास नहीं कर रहे, बल्कि वे अपने गांव, जिले और देश का नाम रोशन कर रहे हैं। आने वाले समय में इन बच्चों की कामयाबी की कहानियाँ न सिर्फ स्थानीय, बल्कि राष्ट्रीय मंच पर भी गूंजेंगी।

यह कहानी न सिर्फ एक स्कूल की है, बल्कि उस सोच की है, जो परिवर्तन की नींव रखती है। SKD विद्यालय का यह कारवां यूँ ही चलता रहेगा – सफलता की नई इबारतें लिखता हुआ।

रिपोर्ट: CIB India News
स्थान: जहानगंज, उत्तर प्रदेश

 

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