उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के मडराक थाना क्षेत्र के गांव मोहनपुर में एक ऐसा वाकया सामने आया जिसने पूरे जिले ही नहीं, बल्कि देशभर में सनसनी फैला दी। यह कोई आम प्रेम कहानी नहीं थी, बल्कि एक ऐसी दास्तान थी जिसमें रिश्तों की परिभाषाएं टूटती नज़र आईं और समाज के बनावटी बंधनों को चुनौती मिली। यह कहानी है सपना और राहुल की थी
राहुल थाना दादों क्षेत्र का रहने वाला है जबकि सपना एक विवाहित महिला थी, उम्र चालीस के आसपास लेकिन उसका जीवन एक आम ग्रामीण महिला की तरह ही था—पति, बच्चे और घर-गृहस्थी। लेकिन सपनों के पीछे दर्द की एक गहरी परत थी जिसे शायद कोई सुनता नहीं था, कोई समझता नहीं था। उसका पति शराबी था, आए दिन मारपीट करता, गालियां देता और उसे मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित करता। सपना की ज़िंदगी एक ऐसे अंधेरे कमरे में सिमटी हुई थी, ये बात सपना के द्वारा पुलिस को बताई है और अपने पहले पति पर गम्भीर आरोप लगाए है
दूसरी ओर राहुल, उम्र में सपना से कहीं छोटा, एक साधारण युवक था, जो सपना की बेटी का होने वाला मंगेतर था। राहुल और सपना की पहली मुलाकात उस वक्त हुई जब शादी की बातचीत चल रही थी। अकसर राहुल का फोन बेटी से बात करने के लिए आता, लेकिन कई बार वो सपना से भी बात करने लगता। शुरुआत में ये बातचीत सामान्य थी, लेकिन धीरे-धीरे ये एक गहरे जुड़ाव में बदल गई। सपना को पहली बार ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई उसकी बातें सुन रहा हो, समझ रहा हो।
राहुल के शब्दों में उसे सुकून मिलता, जो उसके पति की चीख-चिल्लाहट में कहीं खो गया था। राहुल भी सपना की आवाज़ में एक सच्चाई और अपनापन महसूस करता, जो उसके आसपास की दुनिया में नहीं था। इस अनोखी दोस्ती ने कब मोहब्बत का रूप ले लिया, दोनों को पता ही नहीं चला।
जब बेटी को इस बारे में शक हुआ तो घर में हंगामा मच गया। सपना की बेटी ने मां पर तरह-तरह के आरोप लगाने शुरू कर दिए। और जब सपना के पति को यह सब पता चला, तो बात और बिगड़ गई। वह सपना को जान से मारने की धमकी देने लगा। इसी तनाव और असहनीय माहौल से तंग आकर सपना ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी।
6 अप्रैल की रात सपना अपने दामाद राहुल के साथ फरार हो गई।
सिर्फ साथ नहीं गई, बल्कि घर से नकदी और जेवरात भी लेकर निकल गई। पूरे गांव में तहलका मच गया। लड़की की शादी 16 अप्रैल को तय थी, लेकिन मां और दामाद के भाग जाने से सबकुछ उजड़ गया।
पुलिस इस मामले में हरकत में आ गई। मडराक थाना पुलिस ने कई राज्यों में टीमें भेज दीं। कहीं से कोई सुराग नहीं मिल रहा था। उत्तराखंड में भी तलाश हुई, लेकिन पुलिस के हाथ खाली रहे। सोशल मीडिया पर मामला तूल पकड़ चुका था। लोग अजीब-अजीब टिप्पणियां कर रहे थे—कुछ ने इसे सच्चा प्यार कहा, तो कुछ ने रिश्तों की मर्यादा का अपमान बताया।
लेकिन कहानी का मोड़ तब आया जब 16 अप्रैल को ही, जिस दिन राहुल की बारात जानी थी, दोपहर करीब 2 बजे सपना और राहुल खुद दादों थाने पहुंच गए। उन्होंने थाने में जाकर सबकुछ सच-सच बता दिया। पुलिस भी चकित रह गई। मडराक थाना पुलिस को सूचित किया गया और दोनों को सौंपने की तैयारी शुरू कर दी गई।
क्या कहती है भागी हुई सास
पुलिस पूछताछ में सपना ने जो बताया, वह किसी भी औरत के दर्द को बयां करने के लिए काफी था। उसने कहा, “मैं अपने पति के साथ नहीं रह सकती। वह रोज शराब पीकर मुझ पर हाथ उठाता है। मैं अब अपने जीवन के बाकी दिन सिर्फ राहुल के साथ बिताना चाहती हूं। वह मेरी इज्जत करता है, मेरी बात सुनता है। मुझे सुकून देता है।”राहुल ने भी सपना की बातों की पुष्टि करते हुए कहा, “हम पहले अलीगढ़ से कासगंज गए, फिर वहां से बरेली पहुंचे। उसके बाद बिहार के मुजफ्फरपुर पहुंचे। हमने सोशल मीडिया नहीं खोला था, लेकिन जब दो दिन पहले मोबाइल ऑन किया तो देखा हर जगह हमारे चर्चे हो रहे हैं। तब हमें लगा कि अब खुद सामने आकर सच बता देना चाहिए। इसलिए हम दिल्ली पहुंचे और वहां से वापस यूपी लौट आए।”
उन्होंने यह भी बताया कि वो नेपाल तक भी पहुंच गए थे, लेकिन वहां की ज़िंदगी उन्हें नहीं भाई। उन्हें लगा कि भाग कर कहीं सुकून नहीं मिलेगा। उन्होंने फैसला किया कि जो भी होगा, अब सबकुछ सच के साथ होगा।
क्या एक औरत को अपनी मर्जी से जीवन साथी चुनने का अधिकार नहीं? भले ही वह रिश्ता पारंपरिक सामाजिक नियमों के खिलाफ हो। क्या किसी महिला को अपनी तकलीफ से भागने का कोई रास्ता नहीं होता, जब उसके अपने ही घर में उसकी चीखें अनसुनी हो जाती हैं?
