उत्तर प्रदेश विधानसभा के सत्र में आज समाजवादी पार्टी के विधायक नफीस अहमद ने प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिकांश सरकारी अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। मरीजों को उचित इलाज और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नफीस अहमद ने कहा कि अस्पतालों में पर्याप्त मेडिकल उपकरण और आधुनिक मशीनों का भी अभाव है। इससे गंभीर बीमारियों का समय रहते इलाज नहीं हो पाता। इतना ही नहीं, मरीजों को जरूरी दवाइयां भी अस्पताल से नहीं मिल रही हैं, जिसके चलते उन्हें महंगी दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। यह स्थिति गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
विधायक ने गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की खराब स्थिति का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गोपालपुर के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी है। स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयां और जरूरी मशीनें भी उपलब्ध नहीं हैं, जिससे इलाज में बाधा आ रही है।
इसके अलावा, नफीस अहमद ने समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार के दौरान लकवा से बचाव के लिए मुफ्त में लगाए जाने वाले इंजेक्शन को बंद किए जाने का मुद्दा भी सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि यह इंजेक्शन गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित होते थे। इनका बंद होना सरकार की जनता विरोधी नीतियों को दर्शाता है।
नफीस अहमद ने जोर देते हुए कहा, “स्वास्थ्य सेवाओं जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता हर नागरिक का अधिकार है। समाजवादी पार्टी हमेशा जनता के अधिकारों और जरूरतों के लिए आवाज उठाती रही है और आगे भी लड़ाई जारी रखेगी।”
उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था में तत्काल सुधार लाया जाए, डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की भर्ती की जाए, आधुनिक मशीनें और दवाइयां उपलब्ध कराई जाएं, ताकि आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
