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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया बाबा विश्वनाथ का दर्शन

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वाराणसी :- केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का हाल ही में वाराणसी और प्रयागराज का दौरा एक महत्वपूर्ण और श्रद्धापूर्ण यात्रा के रूप में देखा गया। उन्होंने अपने परिवार के साथ महाकुंभ स्नान के बाद वाराणसी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए और काशी की पवित्र धरती पर भक्ति भाव में डूबे नजर आईं। यह उनका निजी दौरा था, जो खासतौर पर धार्मिक और आध्यात्मिक अनुभवों के लिए था।

प्रयागराज से वाराणसी तक का आध्यात्मिक सफर

निर्मला सीतारमण ने अपने दौरे की शुरुआत प्रयागराज से की, जहां उन्होंने महाकुंभ स्नान किया। इस स्नान के बाद उन्होंने संगम क्षेत्र में स्थित अक्षयवट और सरस्वती कूप के दर्शन किए। अक्षयवट, जिसे अविनाशी और अखंड सनातन चेतना का प्रतीक माना जाता है, ने उन्हें एक गहरी आध्यात्मिक शांति दी। सीतारमण ने कहा कि यह स्थल अनंतकाल से श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र रहा है। उन्होंने वहां की अद्भुत ऊर्जा और आध्यात्मिक माहौल की सराहना की।

इस यात्रा के दौरान, वित्त मंत्री ने प्रयागराज के धार्मिक महत्व को महसूस किया और अक्षयवट में अपने भावों को श्रद्धा और भक्ति के रूप में व्यक्त किया। इस दौरान उन्होंने संगम के किनारे पर ध्यान और पूजा अर्चना की, और वहां की आस्था को महसूस किया।

वाराणसी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन

प्रयागराज के बाद सीतारमण अपने परिवार के साथ वाराणसी पहुंची। वहां काशी विश्वनाथ मंदिर में उनका भव्य स्वागत हुआ। उन्होंने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए और मंदिर परिसर में पूजा अर्चना की। इस दौरान वह पूरी तरह से भक्ति भाव में डूबी दिखीं। काशी के ऐतिहासिक घाटों पर क्रूज यात्रा के दौरान उन्होंने गंगा माता को प्रणाम किया और गंगा के पवित्र जल में आस्था का अनुभव किया।

निर्मला सीतारमण ने काशी के 84 घाटों का भी दौरा किया। इन घाटों के धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को जानकर उन्होंने इसके संरक्षण और विकास के लिए अपनी चिंता व्यक्त की। काशी के घाटों पर यात्रा करते हुए उन्होंने पर्यटकों और श्रद्धालुओं से भी बातचीत की और काशी की धरोहर को संरक्षित करने के प्रयासों की सराहना की।

मां अन्नपूर्णा के मंदिर में पूजा

बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद निर्मला सीतारमण मां अन्नपूर्णा के मंदिर भी पहुंची। उन्होंने मंदिर परिसर में घूमते हुए भक्तों के साथ संवाद किया और आशीर्वाद लिया। यह उनके धार्मिक यात्रा का एक और महत्वपूर्ण स्थल था, जहां उन्होंने मां अन्नपूर्णा से आशीर्वाद प्राप्त किया और अपनी आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढ़ाया।

बरेका में नए ट्रेन इंजन का शुभारंभ

वाराणसी में अपने धार्मिक कृत्यों के बाद, केंद्रीय वित्त मंत्री ने बरेका (बनारस रेल इंजन कारखाना) का दौरा किया, जहां उन्होंने विद्युत रेल इंजन WAP7 को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर बरेका महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह और अन्य अधिकारी उपस्थित थे। निर्मला सीतारमण ने लोको पायलट रूम का दौरा भी किया और इंजन की तकनीकी जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने बरेका की उत्पादन गतिविधियों और इसके तकनीकी पहलुओं को विस्तार से जाना और इसकी कार्यप्रणाली पर संतोष व्यक्त किया। इस दौरान बरेका में नए बने पर्यवेक्षक विश्राम गृह और अमृत कानन सामुदायिक पार्क का उद्घाटन भी किया गया। विश्राम गृह में आधुनिक सुविधाएं और आरामदायक बेड, फर्नीचर और शौचालय की व्यवस्था की गई है।

वंदे भारत ट्रेन में यात्रा

वाराणसी में अपने दौरे के बाद, केंद्रीय वित्त मंत्री ने वंदे भारत ट्रेन में बैठकर दिल्ली के लिए यात्रा की। वंदे भारत ट्रेन भारतीय रेलवे के प्रमुख उपलब्धियों में से एक है, और सीतारमण ने इस ट्रेन के जरिए भारतीय रेल के उन्नत विकास की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया।

केंद्रीय मंत्री रविंद्र जायसवाल ने बताया कि निर्मला सीतारमण अपने परिवार के साथ काशी आई थीं, और उन्होंने महाकुंभ की भव्यता को देखकर प्रदेश सरकार की सराहना की। यह उनके परिवार के साथ एक निजी यात्रा थी, इसलिए इस दौरान उन्होंने कोई सरकारी मीटिंग नहीं की।

निर्मला सीतारमण ने अपने दौरे के दौरान काशी के धार्मिक स्थलों के विकास और रेलवे की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए कई पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने काशी के ऐतिहासिक महत्व को बढ़ावा देने और यात्रियों की सुविधा के लिए और प्रयास करने की बात की। इसके साथ ही उन्होंने काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए सरकार की योजनाओं को साझा किया।

इसके अलावा, वित्त मंत्री ने भारतीय रेल के विकास और आधुनिक इंजन निर्माण की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बरेका में बने नए इंजन और अन्य तकनीकी पहलुओं को सराहा और इस क्षेत्र में भारतीय तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार की योजनाओं को स्पष्ट किया।

निर्मला सीतारमण का यह दौरा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं था, बल्कि यह भारत के विकास और संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का एक अवसर था। उनके द्वारा किए गए कार्य और उनके अनुभव इस बात को साबित करते हैं कि सरकार भारतीय समाज और उसकी संस्कृति को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, यह यात्रा एक प्रेरणा देती है कि आध्यात्मिक और धार्मिक यात्रा को व्यावसायिक विकास और तकनीकी उन्नति के साथ जोड़ा जा सकता है।

 

 

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