आजमगढ़ जिले के पवई थाना क्षेत्र में एक विवादास्पद मौत को लेकर प्रदर्शन और सड़क जाम करने के मामले में 85 लोगों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया है। प्रशासन ने गंभीरता से कार्रवाई करते हुए भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इनमें 15 नामजद और 70 अज्ञात व्यक्ति शामिल हैं।
सड़क जाम और प्रदर्शन की घटना
मामला सोमवार की रात को शुरू हुआ जब पवई थाना क्षेत्र के गालिबपुर गांव में रहने वाले लालू (38 वर्ष) पुत्र सेसनू की मौत हो गई। मंगलवार को आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ठंड लगने से मौत का कारण बताया गया। परिजनों और ग्रामीणों ने इस रिपोर्ट को फर्जी करार दिया और पुनः पोस्टमार्टम कराने की मांग की। इसी मांग को लेकर मंगलवार को शव को सड़क पर रखकर पवई-कलान मार्ग को जाम कर दिया गया।
प्रदर्शन के कारण सड़क पर लगभग दो घंटे तक यातायात ठप रहा। सड़क जाम के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस दौरान कई वाहन फंसे रहे और यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा। पुलिस प्रशासन ने तत्काल मौके पर पहुंचकर हालात को नियंत्रित किया और सड़क को खाली करवाया।
विवाद का कारण
लालू के परिवार और पट्टीदारों के बीच भूमि को लेकर पुराना विवाद चल रहा था। लालू की पत्नी ने पुलिस को बताया कि घटना से दो दिन पहले भी पट्टीदारों से झगड़ा हुआ था। झगड़े के दौरान पट्टीदारों ने लालू को जान से मारने की धमकी दी थी। परिजनों का आरोप है कि सोमवार की रात 12 बजे पट्टीदारों ने लालू के साथ मारपीट की, जिससे उसकी मौत हो गई।
परिजनों की मांग थी कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट गलत है और उसमें हेरफेर की गई है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में ठंड से मौत की बात कही गई है, जबकि लालू की हत्या की गई थी। इसी के चलते परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए और शव के साथ सड़क पर प्रदर्शन करने लगे।
प्रशासन की कार्रवाई
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पवई थाना में मुकदमा दर्ज किया गया है। भारतीय दंड संहिता की धाराएं 189 (लोक सेवक को धमकाना), 195 (झूठे साक्ष्य देना), 126, 223, 285 (सार्वजनिक स्थान पर खतरा पैदा करना), 133 (सार्वजनिक अवरोध को हटाने का आदेश), और 7 के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस ने शनि देव, सुरेंद्र, मुंशीलाल, राम दौर सहित 15 लोगों को नामजद किया है, जबकि 70 अज्ञात व्यक्तियों पर भी मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मामले की जांच तेजी से की जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
घटना का प्रभाव
इस घटना से क्षेत्र में तनाव व्याप्त हो गया है। स्थानीय लोगों में गुस्सा और डर का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन को इस मामले में निष्पक्ष जांच करनी चाहिए ताकि दोषियों को सजा मिले। वहीं, कुछ लोग पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं।
पुलिस का पक्ष
पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उनके आधार पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट सही प्रतीत होती है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर परिजन या अन्य किसी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर संदेह है, तो वह कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की जांच की मांग कर सकते हैं।
निष्कर्ष
पवई थाना क्षेत्र में हुई इस घटना ने एक बार फिर से कानून-व्यवस्था के मुद्दे को सामने ला दिया है। प्रशासन और पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करते हुए सड़क को खाली करवाया और मुकदमा दर्ज किया, लेकिन अब सभी की नजरें मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या सच्चाई सामने आती है और क्या दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जा सकेगा।
