महाकुंभ के अवसर पर आज श्री पंचायत महानिर्वाणी अखाड़े की पेशवाई निकाली गई। यह शोभायात्रा न केवल साधु-संतों के भव्य प्रदर्शन का प्रतीक है, बल्कि भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत उदाहरण भी है। इस पेशवाई में एक हजार से अधिक साधु-संत, हाथी-घोड़े, और सजे-धजे रथों के साथ भाग लिया। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था देखने लायक था।
शिव बराती और नर-पिशाचों का प्रदर्शन
पेशवाई के दौरान, कलाकार शिव बराती के रूप में नर-पिशाच बने और उन्होंने तांडव नृत्य किया। बक्शी पुलिस चौकी के सामने इन कलाकारों ने मुंह से आग उगलने और भस्म की होली खेलने जैसे अद्भुत करतब दिखाए। यह प्रदर्शन श्रद्धालुओं के लिए रोमांचक और अद्वितीय अनुभव रहा।
शोभायात्रा का रूट और स्वागत
पेशवाई बाघंबरी गद्दी के सामने महानिर्वाणी अखाड़े के भवन से शुरू हुई। यह संगम रेलवे लाइन से होकर बक्शी बांध की दिशा में आगे बढ़ी। हजारों श्रद्धालु रास्ते में फूल बरसाकर साधु-संतों का स्वागत कर रहे थे। साधु-संतों की यह शोभायात्रा कुंभ मेले के मुख्य क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले विभिन्न पड़ावों पर रुकी।
नागा सन्यासियों का युद्ध कौशल प्रदर्शन
पेशवाई में नागा सन्यासियों ने अपने अस्त्र-शस्त्र के साथ युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया। सड़कों के किनारे दो घोड़ों पर सवार नागा सन्यासी नगाड़ा बजाते हुए चल रहे थे। यह दृश्य लोगों को प्राचीन भारतीय युद्धकला की झलक दिखाने के साथ-साथ अद्वितीय धार्मिक अनुभव भी प्रदान कर रहा था।
अखाड़े का ध्वज और रथ की विशेषताएं
महानिर्वाणी अखाड़े की पेशवाई में सबसे आगे अखाड़े का ध्वज था। इसके पीछे नागा सन्यासियों का समूह करतब दिखाते हुए चल रहा था। रथ पर आरूढ़ कपिल मुनि की मूर्ति को श्रद्धा के साथ सजाया गया। इस रथ पर महात्मा चंवर डुलाते हुए और फूल बरसाते हुए चल रहे थे। यह दृश्य पूरी पेशवाई में आध्यात्मिकता और भव्यता का संचार कर रहा था।
उर्दू शब्दों से दूरी
इस बार पंचायती अखाड़े ने उर्दू नामों से दूरी बना ली है। आमंत्रण पत्रों में “पेशवाई” के स्थान पर “कुंभ मेला छावनी प्रवेश शोभायात्रा” लिखा गया है। साथ ही, “शाही स्नान” शब्द को भी परिवर्तित कर “कुंभ अमृत स्नान” कर दिया गया है। यह परिवर्तन परंपरा और आधुनिकता के समन्वय का प्रतीक है।
धर्म ध्वजा की स्थापना
श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी की धर्म ध्वजा 22 दिसंबर को स्थापित की गई थी। 78 फीट ऊंची यह धर्म ध्वजा पूरे कुंभ मेले के दौरान लहराती रहेगी। यह ध्वजा अखाड़े की पहचान और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। महानिर्वाणी अखाड़े के आराध्य देव भगवान कपिल महामुनि हैं, जो भगवान विष्णु के 24 अवतारों में से पांचवें अवतार माने जाते हैं। धर्म ध्वजा की स्थापना अखाड़े की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाती है।
अन्य अखाड़ों की पेशवाई
अब तक महाकुंभ में चार अन्य अखाड़ों की पेशवाई निकल चुकी है। प्रत्येक अखाड़े का रूट अलग था, और इनकी शोभायात्रा सुबह से शुरू होकर देर शाम तक अपने गंतव्य तक पहुंची। महानिर्वाणी अखाड़े की पेशवाई भी शाम तक कुंभ के मुख्य क्षेत्र में प्रवेश करने की संभावना है।
श्रद्धालुओं का उत्साह
पेशवाई के दौरान हजारों श्रद्धालु मार्ग के किनारे एकत्र होकर साधु-संतों और नागा सन्यासियों का स्वागत कर रहे थे। फूलों की वर्षा और भक्ति गीतों के माध्यम से श्रद्धालुओं ने अपने भाव प्रकट किए। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक आस्था को सुदृढ़ करता है, बल्कि भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ों को भी उजागर करता है।
महाकुंभ में आयोजित इस पेशवाई ने धार्मिकता, परंपरा, और भव्यता का जो दृश्य प्रस्तुत किया, वह वर्षों तक लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेगा।
