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महादेवी हायर सेकेंडरी स्कूल में धूमधाम से मनाया गया स्वतंत्रता दिवस

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ध्वजारोहण के साथ ही संपन्न हुआ स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम

आजमगढ़ सिधारी स्थित महादेवी हायर सेकेंडरी स्कूल में स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया
आपको बताते चलें कि सर्वप्रथम कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजा रोहण विद्यालय के प्रबंधक डीपी मौर्य, प्रधानाचार्य रामनयन मौर्य, उप प्रधानाचार्य एस.एन. यादव ने किया । उसके बाद राष्ट्रीय गान से पूरा प्रांगण गूंज उठा । माल्यार्पण के क्रम में सर्वप्रथम सरस्वती जी के चित्र पर और उसके पश्चात महापुरुषों एवं देशभक्तो के चित्र पर माला पहनाकर उनको श्रद्धा सुमन अर्पित किया ।
कार्यक्रम के क्रम में सर्वप्रथम नर्सरी के बच्चों ने विभिन्न फ्रीडम फाइटर की सजीव झांकी प्रस्तुत की जिसे लोगों ने खूब सराहा । यूकेजी के छात्रों ने यूनिटी इन डाइवर्सिटी के थीम पर लघु नाटिका प्रस्तुत किया जिसमें एकता का संदेश दिखा ।उसके बाद यूकेजी के छात्रों ने जय हो की भावपूर्ण नृत्य की प्रस्तुति दी । इसी प्रकार कक्षा प्रथम के बच्चों ने पर्यावरण बचाओ थीम पर म्यूजिकल लघु नाटिका प्रस्तुत किया जिसमें हरियाली थीम को बच्चों ने मंच पर दिखाया। कक्षा 3 से लेकर 8 तक के छात्र-छात्राओं ने एक से बढ़कर एक देशभक्ति गीतों पर नृत्य के माध्यम से कार्यक्रम में देशभक्ति की भाव जागृत किया गया।
विद्यालय के प्रबंधक डीपी मौर्य ने बताया कि 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हो गया था। इसके बाद से प्रतिवर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस का पर्व मनाते हैं। भारतीय इस दिन ध्वजारोहण करते हैं, कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश की आजादी के लिए लड़ने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, आजादी के बाद भारत को एक लोकतंत्र राष्ट्र बनाने में योगदान देने वाले नेताओं और सीमा पर देश की सुरक्षा करने वाले जवानों की शहादत को याद किया जाता है और नमन किया जाता है।
देश को आजाद हुए 78 साल पूरे हो चुके हैं। आज के बच्चों और युवाओं को उस दौर के संघर्ष और शहीद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की भूमिका को याद करना चाहिए।
प्रधानाचार्य रामनयन मौर्य ने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए बच्चों को अपनी बधाई दी और अच्छे नागरिक बनने की सलाह दी।
कार्यक्रम को सफल बनाने में उप प्रधानाचार्य एसएन यादव, कोऑर्डिनेटर आनंद मौर्य, रामचरण मौर्य, दीपिका सिंह, समीक्षा सिंह ,आरोही मोदनवाल, किशन यादव, धीरेंद्र मोहन, शरद गुप्ता आदि शिक्षक-शिक्षिकाओं का सराहनीय योगदान रहा ।

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