Breaking News

नए साल का ऐसा आगाज़ आपने देखा नहीं होगा , एक अधिकारी की अनोखी पहल

Spread the love

कहते हैं किसी के आने की अगर ख़ुशी हो तो किसी के जाने का गम भी होता है …लेकिन ये दुनिया ऐसी मिसालों से भरी पड़ी है ..जिसमे जाने की ख़ुशी भी है …और उससे बहुत कुछ सीखकर आने वाले पल को …समय को बेहतरीन बनाने का ज़ज्बा और हुनर भी है ..
.ऐसा ही हुआ नव वर्ष की पूर्व संध्या पर मऊ जिले के मोहम्मदाबाद गोहना तहसील में ..जब तहसीलदार राहुल कुमार गुप्ता ने अपने तहसील के अधिवक्ताओं के साथ मिलकर नए साल के आगमन को बेहद खूबसूरत बना दिया . साहित्यिक सोच इस अधिकारी ने एक नयी पहल करके सबके एक धागे में पिरो दिया और दिखा दिया कि भारत की यही खूबसूरती है . नव वर्ष की पूर्व संध्या पर एक तरफ जहाँ दुनिया नए साल के आगमन का स्वागत करने के लिए तैयार हो रही थी …ठीक उसी समय मोहम्मदाबाद गोहना तहसील के अधिवक्ताओं ने अलग शमा बाँध दिया . इस कार्यक्रम में अधिवक्ता इनाम खान ने जहाँ अपने गीतों से सबको झूमने पर मजबूर कर दिया तो दूसरी तरफ अधिवक्ता खुर्शीद अहमद ने अपने गीतों से ऐसा शमा बांधा कि यकीन कर पाना मुश्किल था कि हम रफ़ी साहब या महेंद्र कपूर जी को सुन रहे हों …वहीँ संचालन कर रहे अधिवक्ता mahnedra ray ने शब्दों की ऐसी बाजीगरी किया कि सुनने और देखने वाले हैरान थे ..उनके एक एक शब्द कानो में जैसे मिश्री घोल रहे हो …जैसे वो कविता में कुछ बोल रहे हों …पहली बार हुए इस शानदार आयोजन में अधिवक्ताओं का अलग रूप देखने को मिल रहा था …वैसे तो जब भी अधिवक्ताओं का जिक्र कहीं होता है …तो मन में एक धीर – गंभीर छवि बनने लगती है ..लेकिन इस महफ़िल ने सारे मिथकों को तोड़ दिया .. अधिवक्ता शायर भी होता है … अधिवक्ता गायक भी होता है ..अधिवक्ता आशिक मिजाज़ और प्रखर व्यंगकार भी होता है ..ये सारी बातें एक ही चाट के नीचे और एक ही कार्यक्रम में देखने को मिला …और सभी ने इसका श्रेय साहित्यिक सोच के धनी तहसीलदार राहुल कुमार गुप्ता को दिया ..
कार्यक्रम जैसे – जैसे आगे बढ़ता गया …संचालनकर्ता की कविता का भेद खुलता गया ..और लोगों के ठहाके गूंजते रहे …इस दौरान तमाम विद्वान अधिवक्ताओं ने अपनी बातों को रखा …फिर सप्लाई इंस्पेक्टर ………………ने महफ़िल में जान डाल दिया …उन्होंने अपने हास्य …अपनी हाजिर जवाबी से अलग शमा बाँध दिया ..जाते जाते कह गए …लगता नहीं है दिल मेरा उजड़े दयार में…इसपर जब तहसीलदार राहुल कुमार गुप्ता ने माईक संभाला तो गजब ढा दिया …प्रेम ..सत्य ..इश्वर ..इबादत ..अकीदत पर अद्भुत पकड़ रखने वाले इस शख्सियत ने उमैर नज्मी
को कोट करते हुए कहाकि  बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं
लगेगा …लगने लगा है …मगर लगेगा नहीं
नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है
मैं ख़ुश नहीं हूं मगर देख कर लगेगा नहीं
हमारे दिल को अभी मुस्तक़िल पता न बना
हमें पता है तेरा दिल इधर लगेगा नहीं …
इस शेर के बाद तहसीलदार राहुल कुमार गुप्ता ने अपने बेहतरीन वक्तव्य से जीवन दर्शन पर बहुत ही सारगर्भित तरीके से रोशनी डाली ..विद्वान अधिवक्ता …पत्रकार ..समाजसेवी ..से जुड़े लोगों की तालियों की गड़गड़ाहट बता रही थी …इस तनाव भरी ज़िन्दगी में अपने लिए …..अपनों के लिए वक़्त निकालकर सोचन की ज़रुरत है ..अंत में युवा तहसीलदार राहुल कुमार गुप्ता ने कार्यक्रम की उपयोगिता पर मीडिया के साथियों के सवालों का जवाब दिया .

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Social media & sharing icons powered by UltimatelySocial