आज़मगढ़ जिले के पुलिस कप्तान कार्यालय पर आज सैकड़ों की संख्या में खिरिया बाग़ आन्दोलन के किसान-मजदूर पहुँच गए , जिनमे ज़्यादातर महिलाओं की संख्या थी . आन्दोलन के संयोजक राजीव यादव के साथ , मैग्सेसे पुरुष्कार से सम्मानित संदीप पाण्डेय भी पुलिस कप्तान को ज्ञापन देने पहुंचे . सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पाण्डेय ने बताया कि मैं वाराणसी से एक पदयात्रा आज़मगढ़ तक करना चाह रहा था , जिसे प्रशासन ने मुझे नज़रबंद कर दिया . मुझसे मिलने आ रहे राजीव यादव को सादे कपड़ों में , बगैर नंबर की गाड़ी से आये कुछ लोगों ने मारपीट कर उठा लिया , और उनसे पिस्टल इत्यादि की बात करने लगे . राजीव यादव एक सामाजिक कार्यकर्ता है उनका मानसिक उत्पीड़न किया गया . हम इसी मामले में कार्यवाही के उद्देश्य से आज पुलिस कप्तान को ज्ञापन सौंपने आये हैं . वहीँ राजीव यादव ने कहाकि मुझे मारा गया , मैं सामाजिक कार्यकर्ता हूँ लेकिन मेरे साथ अपराधियों जैसा सलूक हुआ . राजीव ने आरोप लगाया कि ये लोग मेरा इनकाउंटर करवाने की फ़िराक में थे .
वहीँ जब खिरिया बाग़ के आन्दोलनकारी पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देने पहुंचे तो उन्हें गेट पर ही रोक लिया गया . पुलिस प्रशासन के लोग ज़िद पर अड़ गए कि महिलाओं को अन्दर नहीं जाने देंगे , सिर्फ 5 लोग ज्ञापन लेकर पुलिस कप्तान से मुलाक़ात करें . वहीँ आन्दोलनकारी अड़े थे कि महिलाएं कि शान्ति से महिलायें लान में बैठेंगी , कोई कुछ भी नहीं बोलेगा . पुलिस वाले भी अपनी जिद पर अड़े थे . पुलिस ने आन्दोलनकारियों को डराने धमकाने के तमाम प्रयास किये , यहाँ तक कि गिरफ्तारी करने की भी बात कही . लोगों को ले जाने के लिए बस भी आ गयी . खिरिया के आन्दोलनकारी टस से मस न हुए और गिरफ्तारी देने पर अड़ गए . पुलिस की हर चाल नाकाम हो गयी और फिर जैसा आन्दोलनकारी चाहते थे , उन्ही की शर्तों पर पुलिस कप्तान ने संदीप पाण्डेय , राजीव यादव व अन्य कुछ लोगों को बुलाकर मुलाक़ात किया .
