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जिम्मेदारों की कमाई बन कर रह गए तालाब संरक्षण अभियान : प्रवीण

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खागा/फतेहपुर। नगर के ऐतिहासिक तालाब देखरेख के अभाव व बढ़ती गंदगी के कारण अपना अस्तित्व खो चुका हैं। कभी इन तालाबों का पानी शुद्ध होने के कारण लोग निस्तारी के साथ-साथ पीने के लिए भी उपयोग करते थे। अब पक्का तालाब की बढ़ती गंदगी के कारण यहां का पानी पीना तो दूर निस्तारी करने के लिए भी सोचना पड़ रहा है।
नगर के अन्य तालाबों पर भी नजर दौड़ाया जाए तो सभी गंदगी से अटा पड़ा है। प्राचीन पक्का तालाब की स्थिति चिंताजनक है। प्राचीन ऐतिहासिक पक्का तालाब को संवारने के लिए सही ढंग से कोई पहल नहीं हो पा रही है। कभी-कभार सफाई करने के बाद नजर अंदाज किया जा रहा है। इससे नागरिकों में आक्रोश है। नागरिकों का कहना है कि तालाब की सुध लेने के लिए कोई भी अफसर या जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचते। तालाब में पॉलीथिन, कागजों व कचरों का ढेर है। वार्डवासी नरेन्द्र, राजू, रवि, श्याम ने बताया कि नियमित साफ-सफाई नहीं होने से तालाब अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। कई लोग निस्तारी तालाब में ही गंदगी फैला रहे हैं। लोगों में जागरूकता का अभाव भी तालाबों में गंदगी की वजह है। इसके अलावा तालाब गहरीकरण नहीं होने की वजह से जलभराव क्षमता भी कम होने लगी है। गंदगी की वजह से लोग परेशान हो रहे हैं। वहीं कई तालाब में पानी नहीं भरा गया है। इस वजह से जलभराव क्षमता घटने लगी है। साथ ही कई वर्षों से पानी नहीं बदलने बदबू आ रही है। बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के केंद्रीय अध्यक्ष प्रवीण पाण्डेय ने बताया कि तालाबों के संरक्षण के आने वाला बजट केवली जिम्मेदारों की कमाई का अभियान बन कर रह गया है। बुंदेलखंड राष्ट्र समिति द्वारा पक्का तालाब के संरक्षण के लिए ज्ञापन देकर खून से पत्र लिखकर, 51 साड़ियों की राखी बांध कर, 2501 दीप जलाकर, हस्ताक्षर अभियान हो चुका है। सरकार व शासन से पक्के तालाब के संरक्षण और धरोहर घोषित करने की मांग की जा रही है।

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