आजमगढ़ :- आजमगढ़ की पहचान रणतूर्य हिंदी दैनिक के संस्थापक संपादक स्मृतिशेष धनुषधारी सिंह की आज 10वीं पुण्यतिथि मनायी गयी. इस अवसर पर उनकी स्मृतियों को नमन करते हुए, आगत जनों और अतिथियों द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि दी गयी. इस अवसर पर उनकी जीवट पत्रकारिता को याद किया गया।
ठंडी सड़क स्थित रणतूर्य कार्यालय पर वक्ताओं ने उन्हें याद करते हुए कहा कि- संपादक जी ने आजमगढ़ में पत्रकारिता को एक मुकाम दिया.। रणतूर्य अखबार पत्रकारिता की नर्सरी के रूप में भी जाना जाता है. अनेक पत्रकार और कलमकार इस अखबार से पैदा हुए। रणतूर्य शब्द को नये मायने देने वाले, वे ग्रामीण चेतना के कुशल कलमकार, संपादक भर ही नहीं थे बल्कि संपादक सत्ता भी थे. आज संपादक सत्ता का जिस तरह से क्षरण होता जा रहा है. ऐसे समय में धनुषधारी सिंह की पत्रकारिता को लोग याद करते हैं. एक छोटे कस्बाई शहर आजमगढ़ से भी दैनिक पत्र निकल सकता हैं, उसे निकाल कर उन्होंने साबित कर दिया कि छोटे जगहों से भी बड़े काम हो सकतें हैं।
महराणा प्रताप सेना के प्रमुख विजेन्द्र सिंह ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि आज के दौर में यह बहुत बड़ा संकट है जबकि पत्रकारिता पर संकट आता है या पत्रकार खतरे में होता है तो समाज के लोग उसके साथ खड़े नहीं होते है। यह बहुत बड़ा दुर्भाग्य है। अब वक्त आ चुका है कि पत्रकारों के हित के लिए समाज से एक व्यापक जन आन्दोलन होना चाहिए। यही सच्चे मायने मंे बाबू धुनषधारी सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
निजामाबाद के लोकप्रिय विधायक आलमबदी ने बाबू धनुषधारी सिंह से अपने रिश्ते को याद करते हुए कहा कि जब भी ठंडी सड़क से गुजरा अपने दोस्त धनुषधारी से जरूर मिला।
जर्नलिस्ट क्लब के अध्यक्ष पं0 आशुतोष द्विवेदी ने कहा कि आज पत्रकारिता बड़े मुश्किल दौर से गुजर रही है। बाबू जी की सीखों से आज के दौर में कलम को धार दे सकते है।
वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल कादिर बागी ने कहा कि इतना जीवट का पत्रकार हम लोगों के सम्पर्क में नहीं आया। बाबू धनुषधारी सिंह कभी किसी से नहीं डरे।
वरिष्ठ पत्रकार डा० अरविंद सिंह ने कहा कि स्मृति शेष पत्रकार मुखराम सिंह ने इस पत्र का नामकरण किया था. अस्सी के दशक में जब देश और समाज की परिस्थितियों में तेजी से बदलाव आ रहें थें. उन्हीं दिनों धनुषधारी सिंह ने इस पत्र के माध्यम से उस बदलाव को समाज के सामने शब्द सत्ता से मुखर किया. ऐसे शब्द शिल्पी हमेशा जीवित रहते हैं लोगों के मानस और जन की स्मृतियों में. आज उनकी पुण्यतिथि है. शब्द सत्ता और संपादक सत्ता के इस अदभुत चितेरे थे।
आखिर में धनुषधारी सिंह के सुपुत्र महेन्द्र सिंह अपने विचार प्रकट कराना शुुरू किया लोग शान्त होकर सुनने लगे। पिता और पुत्र की स्मृृतियाँ और संघर्ष का एक-एक पल चल-चित्र की तरह दिखने लगा। भावुक मन से आगजनों का आभार व्यक्त किया वहीं इस कार्यक्रम को अनवरत् चलायें जाने का प्रण भी लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्वांचल के वरिष्ठ विधिवेत्ता और धनुषधारी सिंह भतीजे शत्रुघ्न सिंह ने अपने चाचा की स्मृतियों को लोगों के बीच में साझा किया और कहा कि पत्रकारिता से ज्यादा पवित्र व महान पेशा दूसरा नहीं है। मेरा तो लगाव ही पेशे से दोनों पक्षों से था, एक तो घर में चाचा स्वयं प्रकांड़ सम्पादक रहे दूसरे मेरे ससुर स्व0 मुखराम सिंह पूर्वांचल के जाने माने पत्रकार रहे। यह जोड़ी आजमगढ़ के पत्रकारिता की अद्भुत जोड़ी थी।
कार्यक्रम का सफल संचालन करने वाले वरिष्ठ पत्रकार संजय पाण्डेय ने स्व0 धनुषधारी सिंह और रणतूर्य परिवार की जो स्मृतियों की रूपरेखा खिंचा लोग मंत्रमुग्ध हो गये।
कार्यक्रम को सूचना अधिकारी अशोक कुमार, राणा प्रताप सिंह, औरंगजेब आजमी, खुर्रम आलम नोमानी, वसीम अकरम, अशोक वर्मा, अखिलेश सिंह, रंगकर्मी अभिषेक पंडित, पवन सिंह, महेन्द्र प्रताप सिंह, गिरीश चन्द्र यादव (वित्त परामर्शदाता, जिला पंचायत) महेन्द्र पाल सिंह (शिक्षा विभाग) राणा सिंह (लेखाकार, डीएम कार्यालय) रामाश्रय सिंह (जिला पंचायत) आदि लोगों ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ शिक्षाविद् फौजदार सिंह, भाजपा जिला उपाध्याय ब्रजेश यादव, वेदप्रकाश सिंह लल्ला, विनीत सिंह, विनोद सिंह, सौरभ उपाध्याय, राजकुमार सिंह, संदीप अस्थाना, राणा सिंह, उपेन्द्रनाथ मिश्रा, धर्मेन्द्र श्रीवास्तव, अनिल पाण्डेय, रामकृष्ण यादव, नूर मुहम्मद, अजय प्रकाश, अच्युतानन्द त्रिपाठी, दुर्गेश श्रीवास्तव, देवेन्द्र कुमार सिंह, गौरव श्रीवास्तव, शार्दुल सिंह, रामप्यारे, अनुज यादव, निखलेश पंडित आदि सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता शत्रुघ्न सिंह और संचालन संजय पांडेय ने किया।
