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प्रयागराज संगम नगरी में आज धूमधाम से मनाया जा रहा महाशिवरात्रि का पर्व

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प्रयागराज : संगम नगरी प्रयागराज में आज धूमधाम से महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है जहां संगम नगरी प्रयागराज में गंगा जमुना सरस्वती में भोर से ही श्रद्धालु नहा रहे हैं और मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार इकट्ठा होना शुरू हो गई है, वहीं संगम पर भी श्रद्धालु ध्यान, ज्ञान और स्नान के पर्व में भक्तिमय हो रहे हैं। प्रयागराज के विभिन्न शिवालयों में श्रद्धालु स्नान के बाद भगवान शिव की आराधना में गंगा जल लेकर कतार में खड़े हैं। दूध और गंगाजल से अभिषेक कर सारे दिन व्रत का पालन करते हुए भगवान शिव से उनके भक्त अध्यात्म शांति और समृद्धि की पूजा करेंगे, खासतौर से महिलाओं में माना जाता है कि, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होगा। पौराणिक मान्यताओं में भी भगवान शिव की आराधना के लिए शिवरात्रि का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। भगवान शिव अघोर एवं शक्ति के स्वरूप के उपासक हैं, माना यह भी जाता है कि रावण ने भी भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवरात्रि का पूजन किया था ।24 घंटे तक चलने वाली इस व्रत पूजन को करने के लिए शुभ मंदिरों में उमड़े हुए हैं और कल सुबह शिव को अभिषेक कर अपना व्रत समाप्त करेंगे।
हर चंद्र मास का चौदहवाँ दिन अथवा अमावस्या से पूर्व का एक दिन शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। एक कैलेंडर वर्श में आने वाली सभी शिवरात्रियों में से, महाशिवरात्रि, को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, जो फरवरी-मार्च माह में आती है। इस रात, ग्रह का उत्तरी गोलार्द्ध इस प्रकार अवस्थित होता है कि मनुष्य भीतर ऊर्जा का प्राकृतिक रूप से ऊपर की और जाती है। यह एक ऐसा दिन है, जब प्रकृति मनुष्य को उसके आध्यात्मिक शिखर तक जाने में मदद करती है। इस समय का उपयोग करने के लिए, इस परंपरा में, हम एक उत्सव मनाते हैं, जो पूरी रात चलता है। पूरी रात मनाए जाने वाले इस उत्सव में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि ऊर्जाओं के प्राकृतिक प्रवाह को उमड़ने का पूरा अवसर मिले  आप अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए निरंतर जागते रहते हैं।
महाशिवरात्रि आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले साधकों के लिए बहुत महत्व रखती है। यह उनके लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है जो पारिवारिक परिस्थितियों में हैं और संसार की महत्वाकांक्षाओं में मग्न हैं। पारिवारिक परिस्थितियों में मग्न लोग महाशिवरात्रि को शिव के विवाह के उत्सव की तरह मनाते हैं।
संवाददाता : परवेज आलम, छविनाथ पाठक

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