आजमगढ़ : शहर से सटे परानापुर स्थित हनुमान मंदिर पर चल रहे रामकथा के तीसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे डीपीआरओ लालजी दूबे ने धर्म पर बड़ा व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि धर्म ही शरीर की आत्मा होती है और आत्मा का सीधा साक्षात्कार परमात्मा से होता है। ऐसी स्थिति में धर्म की राह पर चलकर हम परमात्मा से सीधा साक्षात्कार कर सकते हैं और परमार्थ को प्राप्त हो सकते हैं। श्री दूबे ने कहा कि धर्म बहुत बड़ा विषय है। धर्म को विस्तार से जाने बगैर भी हम खुद को परमात्मा को समर्पित करके अपना जीवन सफल कर सकते हैं। सरकारी सेवा के साथ-साथ धर्म को पूरी तरह से समर्पित श्री दूबे किसी भी धार्मिक आयोजन में न केवल बिना बुलाये पहुंच जाते हैं बल्कि वहां जाकर धर्मज्ञान की गंगा प्रवाहित कर देते हैं। अपने मातहतों व परिचितों के यहां रामकथा या रामचरित मानस पाठ जैसा आयोजन होने पर वह अपना पूरा समय देते हैं और धर्म की संगीतमय व्याख्या भी करते हैं। मिलती है सतगुरू की संगत कभी कभी- विषय से बात शुरू करते हुए श्री दूबे ने कहा कि सतगुरू हर किसी को नहीं मिलता है। सतगुरू से मिलन को पूर्वजन्म का प्रारब्ध भी कह सकते हैं। इस जन्म में यदि सतगुरू न मिले तो कोई बात नहीं, इतना अच्छा कर्म करना चाहिए कि इस जन्म के प्रारब्ध से अगले जन्म में सतगुरू की प्राप्ति होगी और वह सतगुरू जीवन-मरण के बंधन से मुक्ति दिलाकर मोक्ष की प्राप्ति करायेगा। इस दौरान प्रवचन करते हुए प्रख्यात कथावाचक बाल व्यास पं0 गोविन्द शास्त्री ने जटायु वध का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कर्म करने से अधिकार मिलता है और अधिकार मिलने के बाद कर्म न करने से अधिकार छिन जाता है। पं0 शास्त्री ने कहा कि गिद्घराज जटायु ने कर्म किया तो उन्हें भगवान विष्णु की उपाधि मिली। इसके विपरीत विष्णु का पद पाने के बाद कर्म न करने के कारण परशुराम को जंगलों की खाक छाननी पड़ी। उन्होंने कहा कि हम अपने बेहतर कर्म से अपने जीवन को संवार सकते हैं। इस दुनियां में कर्म से बड़ा और कुछ भी नहीं है। तीसरे दिन के कथा के समापन अवसर पर आरती हुई और उपस्थित लोगों को प्रसाद वितरण किया गया।
