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वापस दिलाई जाए पुश्तैनी जमीन

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फतेहपुर। बहुआ ब्लाक के कोर्राकनक ग्राम पंचायत के अन्नदाताओं ने हरेक साल यमुना की कटान में हाथ से बेहाथ हो रही पुश्तैनी जमीन के मामले में मंगलवार आवाज उठाई। किसानों ने तमाम कवायद के बावजूद निदान के कोई प्रयास न किए जाने का आरोप लगाते हुए उस पर समाहित हुई जमीन पर वहां के किसानों के कब्जा करने का खुलासा किया। कहा कि टै्रक्टर से किसान जमीन की जुताई कर रहे थे, मना करने पर तनातनी हुई। स्थानीय पुलिस ने भी उस पार के किसानों का पक्ष लिया।
यह विरोध प्रदर्शन जनसेवक धर्मेंद्र सिंह की अगवाई में हुआ। किसानों ने हर साल कालिंदी में होने वाली करीब 400 एकड़ जमीन का मामला जोरदारी से रखा। जनसेवक ने कहा कि अब तक हजारों किसान अपनी-अपनी जमीन इस विभीषिका में खो चुके हैं। कई चक्र में शासन व प्रशासन स्तर पर इस संबंध में बात हुई लेकिन अभी तक कोई ठोस उपाय नहीं हो सके हैं। जिस कारण इस बार भी कटान में तमाम किसान प्रभावित हुए। हालात भुखमरी व पलायन के बने हैं। इसी 11 अक्टूबर को बांदा जिले के हौंवर गांव के किसानों को टै्रक्टर से जुताई करते देखा गया जबकि नौ अक्टूबर को किसानों के एक समूह ने यमुना उस पार पहुंचकर अपनी सीमांकन से 120 मीटर छोडकर झंडी लगाई थी। बांदा पुलिस का रवैया अपने किसानों की तरफ रहा। उन्हें वहां से दबाव बनाकर बैरंग कर दिया गया। किसानों ने मौजूदा हालात देखते हुए जिला प्रशासन को तत्काल एक्शन लेने की मांग की। ज्ञापन देने वालों में हरमोहन सिंह, कर्णवीर सिंह, मुलायम सिंह, शिव मोहन सिंह, रामराज निषाद, श्यामू लाल सिंह, राजेश सिंह हांडा, शिव सागर प्रसाद, राम बरन सिंह, उमा शंकर सिंह, अजय पाल सिंह, शुभम िंसंह, कृष्णपाल सिंह, राकेश सिंह, राजाराम निषाद, रामू, राज बहादुर, भूरा सिंह, राजाराम, वीरेंद्र प्रसाद भी मौजूद रहे।

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