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आजमगढ़ में फर्जी BSA बनकर ठगी करने वाला शातिर गिरफ्तार, साइबर क्राइम पुलिस ने खोला बड़ा राज….

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आजमगढ़जिले में साइबर ठगी के एक बड़े और चौंकाने वाले मामले का खुलासा हुआ है। साइबर क्राइम थाना आजमगढ़ की टीम ने फर्जी बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) बनकर ईसीसीई शिक्षक (ECCE Educator) पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से हजारों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान राम सिंह निवासी प्रयागराज के रूप में हुई है, जिसे जनपद प्रतापगढ़ के पट्टी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के अनुसार आरोपी अभ्यर्थियों को ईसीसीई शिक्षक पद पर चयन कराने का झांसा देता था। वह प्रत्येक अभ्यर्थी से ₹10,000 से ₹40,000 तक की रकम वसूल करता था। लोगों को अपने झांसे में लेने के लिए उसने बेसिक शिक्षा अधिकारी आजमगढ़ के नाम से फर्जी ई-मेल आईडी बनाई थी। इसके अलावा व्हाट्सएप और ट्रूकॉलर पर भी BSA का नाम और फोटो लगाकर खुद को अधिकारी बताता था, जिससे अभ्यर्थियों को उस पर भरोसा हो जाता था।

इस मामले में 25 दिसंबर 2025 को साइबर क्राइम थाना आजमगढ़ में मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल ट्रेसिंग के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास से दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनकी जांच में फर्जी ई-मेल आईडी, व्हाट्सएप प्रोफाइल, अभ्यर्थियों की सूची, टेलीग्राम ग्रुप और ठगी से जुड़े कई अहम डिजिटल सबूत मिले हैं।

पूछताछ में आरोपी राम सिंह ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि वह सट्टे की लत का शिकार हो गया था और क्रिकेट मैचों में करीब 22 लाख रुपये हार चुका था। इसी नुकसान की भरपाई के लिए उसने खुद को बेसिक शिक्षा अधिकारी बताकर ठगी का रास्ता अपनाया। आरोपी ने स्वीकार किया कि वह पिछले करीब चार महीने से यह काम कर रहा था और अब तक लगभग ₹85,000 की ठगी कर चुका है।

एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि पुलिस टीम ने तकनीकी जांच के जरिए आरोपी के ई-मेल, व्हाट्सएप, ट्रूकॉलर प्रोफाइल और मोबाइल लोकेशन को ट्रेस किया। पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए शिक्षा विभाग की भर्तियों की जानकारी जुटाता था और वहीं से अभ्यर्थियों के मोबाइल नंबर व अन्य विवरण लेकर उनसे संपर्क करता था।

पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी सीधे अपने बैंक खाते में पैसे नहीं मंगवाता था। वह जनसेवा केंद्र संचालकों के क्यूआर कोड का इस्तेमाल करता था और कमीशन देने के नाम पर उन्हीं क्यूआर कोड के जरिए पैसे मंगवाता था, ताकि उसका बैंक खाता ट्रेस न हो सके।

पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में 10 से 20 लोगों के ठगी का शिकार होने की बात सामने आई है। साथ ही यह आशंका भी जताई जा रही है कि इस पूरे मामले में कोई संगठित गिरोह शामिल हो सकता है। फिलहाल पुलिस बैंक स्टेटमेंट की गहन जांच कर रही है और अन्य पीड़ितों की पहचान की जा रही है।

फिलहाल आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी सरकारी नौकरी या भर्ती के नाम पर फोन, ई-मेल या सोशल मीडिया के जरिए पैसे मांगे जाने पर सतर्क रहें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने को सूचना दें।

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