आजमगढ़: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, लोकसभा में मुख्य सचेतक, लोक लेखा समिति भारत के सदस्य एवं आजमगढ़ सांसद धर्मेंद्र यादव ने मंगलवार को लोकसभा में अपने संसदीय क्षेत्र की गंभीर समस्याओं को जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने सरकार और संबंधित मंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की।
धर्मेंद्र यादव ने सबसे पहले आजमगढ़–वाराणसी मार्ग की बदहाल स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह सड़क बौद्ध सर्किट के अंतर्गत लुंबिनी तक जाने वाली एक अहम मार्ग है, जो लगभग 10 साल पहले बनी थी। किंतु आज भी जौनपुर जिले के लगभग 18 किलोमीटर हिस्से में यह मार्ग दो लेन का ही है, जिसके कारण वाहनों को इस दूरी को तय करने में घंटों का समय लग जाता है। उन्होंने मंत्री महोदय से आग्रह किया कि इस छूटे हुए हिस्से को भी जल्द से जल्द फोर लेन में तब्दील किया जाए, जिससे यात्रियों को राहत मिले और पर्यटन को भी बढ़ावा मिले।
सांसद ने कोटिला टोल प्लाजा पर टोल कर्मियों की मनमानी का मुद्दा भी सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि टोल कर्मियों ने आसपास के लिंक रोड पर लोहे के बैरियर लगाकर आम जनता को परेशान कर रखा है। स्थानीय लोग अपने ही गांव-क्षेत्र की सड़कों पर आसानी से नहीं निकल पा रहे हैं। यहां तक कि स्कूल बसों को भी उन संपर्क मार्गों पर जाने की अनुमति नहीं दी जाती, जिससे छोटे बच्चों को रोजाना दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने NHAI के इस “आतंक” को समाप्त कराने की मांग की।
इसके साथ ही धर्मेंद्र यादव ने देशभर के लगभग 25 लाख तथा उत्तर प्रदेश के 2 लाख से अधिक पूर्व-नियुक्त शिक्षकों की टीईटी अनिवार्यता से उत्पन्न असुरक्षा पर भी जोरदार प्रश्न उठाया। उन्होंने कहा कि अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2009 के लागू होने के बाद स्पष्ट किया गया था कि भविष्य में जो भी शिक्षक नियुक्त होंगे, उन्हें टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। जबकि पहले से नियुक्त शिक्षकों को सेवा शर्तों के अनुसार कार्य करने की अनुमति थी और उनके लिए टीईटी आवश्यक नहीं था।
लेकिन 1 सितंबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले ने पूर्व-नियुक्त शिक्षकों पर भी टीईटी पास करने की शर्त लगा दी है। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकारों की कमजोर पैरवी के कारण आज लाखों शिक्षक और उनके परिवार मानसिक तनाव और असुरक्षा की स्थिति में हैं।
सांसद ने सदन से मांग रखी कि सरकार संविधान संशोधन या अध्यादेश लाकर इन 25 लाख शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित करे, विशेषकर उत्तर प्रदेश के उन 2 लाख शिक्षकों का जो इस फैसले से सबसे अधिक प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षकों की समस्याओं को समझते हुए तत्काल सकारात्मक कदम उठाने चाहिए, क्योंकि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं और उनका जीवन संघर्षपूर्ण नहीं होना चाहिए।
धर्मेंद्र यादव की इस मांग का विपक्षी सदस्यों ने भी समर्थन किया और केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई।
