आजम खान का लखनऊ दौरा: अखिलेश यादव संग मुलाकात के सियासी मायने गहराए
लखनऊ की सर्द हवा में समाजवादी राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान अचानक शुक्रवार को सपा मुखिया अखिलेश यादव के लखनऊ स्थित आवास पर पहुंच गए। दोनों के बीच करीब आधे घंटे की बंद कमरे में बातचीत हुई, जिसके बाद आजम खान ने मीडिया से दूरी बनाए रखी और सिर्फ इतना कहा— “मेरे परिवार के साथ बहुत अन्याय हुआ है, मैं अपना दर्द बताने आया था।”
यह बयान भले ही छोटा हो, लेकिन इसके सियासी अर्थ लंबे हैं। दरअसल, पिछले कुछ महीनों से आजम खान और सपा नेतृत्व के बीच खटास की खबरें लगातार उठती रही हैं। रामपुर से तीन बार के सांसद और मुस्लिम राजनीति का मजबूत चेहरा माने जाने वाले आजम खान ने जेल से बाहर आने के बाद से कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिनसे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
कुछ दिन पहले ही अखिलेश यादव खुद रामपुर पहुंचकर आजम खान से मुलाकात कर चुके हैं। उस समय भी यह चर्चा थी कि आजम, बसपा सुप्रीमो मायावती के संपर्क में हैं और शायद लखनऊ की रैली में शामिल होकर बड़ा संदेश दे सकते हैं। लेकिन अखिलेश की उस ‘टाइमली विजिट’ ने राजनीतिक समीकरणों को पलट दिया था। अब आजम खान का लखनऊ पहुंचकर अखिलेश से मिलना एक बार फिर यही संकेत दे रहा है कि समाजवादी कुनबे में मतभेदों की दीवारें शायद दरकने लगी हैं।
सियासी जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा समीकरणों की नींव भी हो सकती है। अखिलेश यादव के करीबी पूर्व विधायक अभिषेक मिश्रा भी एक दिन पहले होटल में आजम खान से मिल चुके हैं। इतना ही नहीं, मुख्तार अंसारी के भाई सिबगतुल्लाह अंसारी और आजम खान के बीच भी एक निजी बैठक हुई, जिसने सपा के अंदर चल रही ‘मुस्लिम चेहरे की राजनीति’ को और रोचक बना दिया है।
आजम खान ने भले ही बयान देकर बातचीत के विषय को निजी बताया हो, लेकिन जिस तरह वे एक-एक कर समाजवादी नेताओं से मुलाकातें कर रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि वे खुद को राजनीति के केंद्र में दोबारा स्थापित करने की कोशिश में हैं।
लखनऊ की इस मुलाकात ने एक बात तो तय कर दी — समाजवादी राजनीति में आजम खान की प्रासंगिकता अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि आने वाले समय में यह सियासी समीकरणों का सबसे अहम पत्ता साबित हो सकते हैं।
