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भींटा देवरिया में यमद्वितीया पर सुजावन देव मंदिर में अपार श्रद्धालुओं की भीड़

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 प्रयागराज । यमद्वितीया के पावन अवसर पर सुजावन देव मंदिर में हर वर्ष की भांति इस साल भी अपार श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दराज से आए भक्तों ने मां यमुना में स्नान कर भगवान सुजावन देव और भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यम द्वितीया के दिन जो भी यहां स्नान करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते हजारों की संख्या में लोग हर साल इस मेला में दर्शन करने आते हैं।

स्थानीय भाषा में इस मेले को ‘जमजूतिया मेला’ कहा जाता है। मेला दीपावली के तीसरे और चौथे दिन यानी द्वितीया और तृतीया को आयोजित होता है। यह मेला लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। कहते हैं कि यमराज इस दिन अपनी बहन यमुना मैया से मिलने भी यहां आते हैं, और इस अवसर पर भक्तों को विशेष आशीर्वाद मिलता है। भक्त यहां आने के बाद सुजावन देव महाराज के दर्शन करते हैं और यमुना मैया में स्नान कर मोक्ष की प्राप्ति की कामना करते हैं।

इस बार भी मेले में भारी भीड़ उमड़ी, और प्रशासन एवं पुलिस को व्यवस्थाओं के लिए विशेष सतर्क रहना पड़ा। क्राइम इनफार्मेशन ब्यूरो आफ इंडिया की टीम ने भींटा सुजावन देव मंदिर में पहुंचकर श्रद्धालुओं की सहायता और सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया। इस टीम का नेतृत्व मंडल अध्यक्ष परवेज आलम ने किया। उनके साथ टीम में राजेश चतुर्वेदी, शिवम द्विवेदी, ब्रहमलोचन पांडे, अतुल यादव, मोहम्मद असफ, राजकरन पटेल, मुकेश द्विवेदी सहित कई सदस्य मौजूद थे।

परवेज आलम ने बताया कि इस मेले में शासन और प्रशासन के सहयोग से सुरक्षा व्यवस्था बेहतरीन ढंग से संभाली गई। उन्होंने एसीपी कौंधियारा अब्दुस सलाम ख़ान और थाना घूरपुर के थानेदार दिनेश सिंह की प्रशंसा की। भारी पुलिस बल के साथ यह व्यवस्था दो दिन तक चलने वाले मेले में पूरी सतर्कता के साथ जारी रही।

भक्तों के लिए यह मेला न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक मेल-जोल और उत्सव का भी अवसर है। दूर-दराज से आए लोग मां यमुना में स्नान करने के बाद अपने परिवार के साथ सुजावन देव मंदिर में दर्शन करने आते हैं। मेले के दौरान आसपास के गांवों और शहरों से आए व्यापारियों ने भी अपने स्टॉल लगाए, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिला।

यमद्वितीया पर सुजावन देव मंदिर का यह मेला आस्था, परंपरा और सुरक्षा के सुंदर समन्वय का प्रतीक बनकर सामने आया। श्रद्धालु यह अनुभव लेकर लौटे कि यहां आकर न केवल आध्यात्मिक तृप्ति मिलती है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा का भरोसा भी मिलता है।

इस प्रकार, इस वर्ष भी सुजावन देव मंदिर का यमद्वितीया मेला अपनी भव्यता और आस्था के लिए यादगार बन गया, और लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर जीवनभर के लिए सुखद स्मृति बनकर रह गया।

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