अज़मगढ़ पब्लिक स्कूल में गरिमामयी ढंग से मनाया गया शिक्षक दिवस
आज़मगढ़।
कोटिला चेकपोस्ट, रानी की सराय स्थित अज़मगढ़ पब्लिक स्कूल में गुरुवार, 4 सितम्बर 2025 को शिक्षक दिवस का आयोजन बड़े ही हर्षोल्लास और गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के प्रति गहरी कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त किया। पूरे विद्यालय का वातावरण उल्लास और श्रद्धा से ओतप्रोत रहा।
उल्लास और कृतज्ञता का मिला-जुला स्वरूप
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना और दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद बच्चों ने कविता-पाठ, गीत और नृत्य प्रस्तुत कर अपने गुरुजनों को नमन किया। बच्चों की मासूम भावनाओं से सजे इन कार्यक्रमों ने पूरे समारोह को जीवंत बना दिया। छात्र-छात्राओं ने अपने शब्दों और कला के माध्यम से यह संदेश दिया कि गुरु ही जीवन के सच्चे पथ-प्रदर्शक और प्रेरणास्रोत होते हैं।
प्रबंधक श्री मोहम्मद नोमान का उद्बोधन
विद्यालय के प्रबंधक चार्टेड एकाउंटेंट श्री मोहम्मद नोमान ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि “विद्यालय की प्रगति और विद्यार्थियों की सफलता में शिक्षकों का योगदान सबसे महत्वपूर्ण है। शिक्षक ही वह शक्ति हैं जो बच्चों को संस्कार और शिक्षा दोनों प्रदान करते हैं। उनके मार्गदर्शन के बिना जीवन अधूरा है।”
उन्होंने शिक्षकों के योगदान को समाज की नींव बताया और उन्हें राष्ट्र-निर्माता की संज्ञा दी।
प्रधानाचार्या श्रीमती रूपल पंड्या का प्रेरक संदेश
विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती रूपल पंड्या ने अपने उद्बोधन में कहा कि “शिक्षक समाज और राष्ट्र की आत्मा होते हैं। उनकी निष्ठा और परिश्रम ही विद्यार्थियों के भविष्य को दिशा प्रदान करता है।”
उन्होंने शिक्षकों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों की हर उपलब्धि के पीछे शिक्षक का त्याग और मार्गदर्शन छिपा होता है।
शिक्षकों को मिला सम्मान
शिक्षक दिवस के इस अवसर पर विद्यालय प्रबंधन की ओर से सभी शिक्षकों को उपहार और स्मृतिचिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त कर शिक्षकों के चेहरे पर गर्व और संतोष की झलक दिखाई दी। शिक्षकों ने विद्यालय प्रबंधन और विद्यार्थियों के इस स्नेहपूर्ण gesture के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि यह सम्मान उनके लिए प्रेरणा और जिम्मेदारी दोनों को बढ़ाता है।
गुरु–शिष्य परंपरा का हुआ महिमामंडन
समारोह के अंत में सामूहिक रूप से यह संदेश गूंज उठा कि गुरु–शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की आत्मा है और शिक्षा ही वह माध्यम है, जो समाज को प्रगति की ओर अग्रसर करता है। यह आयोजन न केवल शिक्षकों के योगदान को रेखांकित करता है बल्कि विद्यार्थियों को भी यह सीख देता है कि सम्मान और कृतज्ञता के बिना शिक्षा अधूरी है।
