नई दिल्ली। सोमवार को संसद में उस वक्त माहौल बेहद गर्म हो गया जब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ सांसद धर्मेंद्र यादव ने ऑपरेशन सिंदूर और पहलगांव आतंकी हमले को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने न केवल इंटेलिजेंस फेलियर की बात उठाई बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा दिए गए सीजफायर वाले बयान पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी।
धर्मेंद्र यादव ने अपने भाषण की शुरुआत शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की और कहा, “जो 26 लोग शहीद हुए हैं, उनका बलिदान राष्ट्र कभी नहीं भूल सकता। देश की सेना ने वीरता का परिचय देते हुए ऑपरेशन सिंदूर को पूरी सफलता से अंजाम दिया, लेकिन यह भी सोचने की बात है कि आखिर ऐसा हमला हुआ कैसे?”
उन्होंने सीधे-सीधे जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (LG) पर हमला करते हुए कहा, “घटना के कई महीने बाद LG साहब कहते हैं कि यह मेरी गलती थी। लेकिन क्या यह केवल उनकी गलती थी? क्या गृह मंत्रालय और केंद्र सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है? अगर यह सामूहिक चूक है, तो कार्रवाई क्या हुई?”
यादव का भाषण उस वक्त और तीखा हो गया जब उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर में भूमिका के दावे पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “जब कोई विदेशी राष्ट्राध्यक्ष बार-बार कहता है कि हमने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति समझौता कराया, तो यह भारत की संप्रभुता पर चोट है। ऐसे दावों पर सरकार की चुप्पी क्या दर्शाती है?”
उन्होंने तीखे लहजे में कहा, “प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों में 56 इंच के सीने की बात करते हैं, पीओके को वापस लाने की घोषणा करते हैं, लेकिन जब हमारी विदेश नीति पर उंगली उठती है, तो कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आती? क्या भारत की प्रतिष्ठा केवल भाषणों से ही बचाई जा सकती है?”
सदन में बोलते हुए धर्मेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि यह जीत न तो किसी एक दल की है, और न ही किसी सरकार की। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर भारत की सेना और 140 करोड़ नागरिकों की सामूहिक ताकत का परिणाम है। यह किसी राजनीतिक दल की जीत नहीं है। लेकिन सत्ता पक्ष ऐसे बर्ताव कर रहा है जैसे युद्ध उन्होंने अकेले ही जीत लिया हो।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विपक्ष ने हमेशा सेना का समर्थन किया है और संकट की घड़ी में एकजुटता दिखाई है। “चाहे समाजवादी पार्टी हो या कांग्रेस, सभी ने एक स्वर में इस हमले की निंदा की और सरकार को पूरा समर्थन दिया। पर जब सरकार अपनी जिम्मेदारी से भागती है, तो सवाल तो उठेंगे ही।”
धर्मेंद्र यादव ने पूर्व रक्षा मंत्री और समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव को याद करते हुए कहा, “जब चीन ने हमारी सीमा पर घुसपैठ की, तब नेता जी के समय हमारी सेना ने दुगना जवाब दिया था। हम डरने वाले लोग नहीं हैं। लेकिन यह सरकार केवल बयानबाज़ी में माहिर है, ज़मीन पर ठोस कदम नहीं दिखते।”
इस दौरान सदन में हंगामा भी हुआ जब उनके भाषण के कुछ अंशों को “अनपार्लियामेंट्री” घोषित करते हुए कार्यवाही से हटाया गया। सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं ने उनके बयानों पर आपत्ति जताई, वहीं विपक्ष ने इसे असहमति की आवाज़ दबाने की कोशिश बताया।
धर्मेंद्र यादव ने दोहराया कि “कोई भी विदेशी यह दावा नहीं कर सकता कि भारत का निर्णय उनकी वजह से हुआ है। भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र है और इसकी नीतियाँ इसकी संसद और जनता तय करती है, न कि कोई अमेरिका या दूसरा देश।”
चर्चा के दौरान कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी सरकार से पारदर्शिता की मांग की और पूछा कि पहलगांव हमले के पीछे खुफिया तंत्र की क्या विफलता रही और आगे ऐसे हमलों को रोकने के लिए क्या रणनीति बनाई जा रही है।
कुल मिलाकर, ऑपरेशन सिंदूर को लेकर संसद में गहराई से बहस हुई और विपक्ष ने सरकार से जवाबदेही की मांग तेज कर दी है। अब पूरे देश की निगाहें इस पर टिकी हैं कि सरकार इस बहस के बाद किस तरह से जनता और संसद को संतोषजनक जवाब देती है।
