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आज़मगढ़ : ऑनलाइन सट्टेबाजी रैकेट का पर्दाफाश, सात गिरफ्तार 

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रिपोर्ट – राहुल मौर्या 

आज़मगढ़। जिले की पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ एक अहम और साहसिक कार्रवाई करते हुए एक बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए के रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस अभियान के तहत पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से करीब 15 लाख रुपये मूल्य का इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किया है, जिसमें 12 मोबाइल फोन, 4 लैपटॉप, जाली दस्तावेज, और अन्य डिवाइस शामिल हैं।

यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) हेमराज मीना के नेतृत्व में की गई, जो साइबर अपराध और अवैध ऑनलाइन गतिविधियों के विरुद्ध लगातार सख्त रुख अपनाए हुए हैं।

शिकायत से शुरू हुई जांच

पूरे मामले की शुरुआत थाना अतरौलिया क्षेत्र के रहने वाले शिवकुमार की शिकायत से हुई, जिन्होंने पुलिस को ऑनलाइन धोखाधड़ी की सूचना दी। जांच में जुटी पुलिस को एक मोबाइल नंबर का सुराग मिला, जिसकी लोकेशन लखनऊ कमिश्नरेट में पाई गई। इसके बाद पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, कॉल ट्रेसिंग और डिजिटल फॉरेंसिक की मदद से नेटवर्क की गहराई से जांच शुरू की।

लखनऊ में चल रहा था रैकेट का हेड ऑफिस

पुलिस जांच में यह साफ हो गया कि यह पूरा रैकेट लखनऊ से ऑपरेट हो रहा था और इसकी शाखाएं देश के अन्य हिस्सों में फैली थीं। गिरोह ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और जुए की वेबसाइटों और ऐप्स के माध्यम से हर दिन लाखों रुपये का अवैध लेन-देन करता था।

यह गैंग अत्यधिक संगठित तरीके से काम करता था, जिसमें अलग-अलग टीमें बनाई गई थीं – कोई डेटा एंट्री करता था, कोई ट्रांजेक्शन मॉनिटर करता था, तो कोई हवाला और क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए पैसे विदेश भेजने की प्रक्रिया को अंजाम देता था।

गिरफ्तारी और जब्ती

लखनऊ में छापेमारी के दौरान पुलिस ने 7 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक उत्तर प्रदेश और बाकी बिहार के निवासी हैं। गिरफ्तार अभियुक्तों में  रणवीर कुमार (सहरसा, बिहार) मोहम्मद शारीख शेख (सहरसा, बिहार)  मोहम्मद रफीक (सहरसा, बिहार)  आलोक कुमार (कानपुर, उत्तर प्रदेश)  अंगद कुमार (सहरसा, बिहार) बदरुल (सहरसा, बिहार)  कृष्ण कुमार (मधुबनी, बिहार) इनके कब्जे से  पुलिस ने  12 मोबाइल फोन, 4 लैपटॉप, 2 लैपटॉप चार्जर,  5 मोबाइल चार्जर, 1 माउस, 2 जाली आधार कार्ड, बरामद किया गया है

गैंग का काम करने का तरीका

गैंग का काम करने का तरीका बेहद हाई-टेक और पेशेवर था। फर्जी बैंक खाते खोले जाते थे, जिनमें देशभर से आए सट्टेबाजी के पैसे डाले जाते। फिर इन पैसों को डिजिटल वॉलेट, क्रिप्टोकरेंसी, और हवाला नेटवर्क के जरिए विदेशों में ट्रांसफर किया जाता था।

गैंग के पास खुद की बैलेंस शीट तैयार करने की टीम थी, जो सभी ट्रांजेक्शन पर नजर रखती और रिपोर्ट बनाती थी। पुलिस को इस बात के भी सबूत मिले हैं कि यह गैंग अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के साथ भी जुड़ा हो सकता है।

SSP हेमराज मीना का बयान

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हेमराज मीना ने इस मामले में बयान देते हुए कहा: “साइबर अपराध और संगठित ऑनलाइन सट्टेबाजी के विरुद्ध यह कार्रवाई एक संदेश है कि कानून से ऊपर कोई नहीं। आगे भी ऐसी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।”

उन्होंने यह भी बताया कि अब इस गिरोह से जुड़े डिजिटल डेटा, फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन, और बैंकिंग गतिविधियों की गहनता से जांच की जा रही है।

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