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राम नवमी पर काशी विश्वनाथ धाम में हुआ अखंड रामायण पाठ का आयोजन

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वाराणसी : श्री काशी विश्वनाथ धाम में इस वर्ष राम नवमी के पावन अवसर पर भक्ति, श्रद्धा और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। पावन चैत्र नवरात्रि के अवसर पर मंदिर प्रशासन द्वारा भव्य अखंड रामायण पाठ का आयोजन किया गया, जो आज 5 अप्रैल को चैत्र शुक्ल अष्टमी के दिन प्रातःकाल प्रारंभ हुआ और कल 6 अप्रैल को राम नवमी की तिथि पर इसका समापन होगा। रामायण पाठ के साथ मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, कलश स्थापना की पूजन विधियां और हवन-यज्ञ का भी आयोजन किया जा रहा है।

अखंड रामायण पाठ का शुभारंभ

प्रातःकाल शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चारण और पूजा-अर्चना के साथ अखंड रामायण पाठ का शुभारंभ हुआ। काशी क्षेत्र के प्रसिद्ध आचार्यों, विद्वानों और ब्राह्मणों की टोली द्वारा श्रीरामचरितमानस का अखंड पाठ प्रारंभ किया गया। मंदिर प्रांगण में स्थापित विशेष मंडप में यह पाठ संपन्न हो रहा है, जहाँ भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है।

रामकथा की मधुर ध्वनि से समस्त धाम वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा है। श्रीराम के जीवन, आदर्शों और मर्यादाओं की गाथा सुनते हुए श्रद्धालु भावविभोर हो रहे हैं। पाठ में बालकांड से लेकर उत्तरकांड तक की सभी घटनाओं का विस्तार से वाचन किया जा रहा है।

धार्मिक परंपरा का संरक्षण

काशी विश्वनाथ धाम के मुख्य पुजारी पं. विश्वेश्वर शर्मा ने बताया कि “अखंड रामायण पाठ सनातन धर्म की एक अत्यंत महत्वपूर्ण परंपरा है, विशेषतः राम नवमी जैसे पर्व पर इसका आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह समाज में मर्यादा, संयम और कर्तव्यपरायणता जैसे मूल्यों को पुनः स्मरण कराने का अवसर भी होता है।”

पाठ के साथ-साथ राम कथा की व्याख्या भी की जा रही है, जिससे भक्त केवल सुन ही नहीं रहे, बल्कि श्रीराम के जीवन से प्रेरणा भी ले रहे हैं।

कलश स्थापना और हवन

प्रथम नवरात्रि पर जो कलश मंदिर चौक में विधिपूर्वक स्थापित किया गया था, उसका समापन भी इसी पावन अवसर पर किया जाएगा। राम नवमी की तिथि पर, 6 अप्रैल को अखंड रामायण पाठ के समापन के पश्चात् विशेष हवन और यज्ञ का आयोजन होगा। इसमें सैकड़ों श्रद्धालु आहुतियाँ अर्पित कर अपने जीवन को पवित्र बनाएंगे।

कलश पूजन के इस समापन अनुष्ठान में मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना के साथ श्रीराम की आरती भी संपन्न होगी। यह पूजा हिंदू धर्म में देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा, संयम और तपस्या की प्रतीक मानी जाती है।

श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

अखंड रामायण पाठ और राम नवमी के इस पर्व को देखने और उसमें भाग लेने के लिए देशभर से श्रद्धालु काशी पहुंचे हैं। मंदिर प्रशासन ने भक्तों की सुविधा हेतु विशेष व्यवस्थाएं की हैं। दर्शन के लिए अलग कतारें, जल सेवा, प्रसाद वितरण, और प्राथमिक उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

एक स्थानीय श्रद्धालु, सुश्री रमा दुबे ने भावुक होते हुए बताया, “श्रीराम की गाथा सुनते हुए मन से सारा बोझ हट जाता है। काशी में राम नवमी का अनुभव करना एक अद्भुत अनुभूति है।”

सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन

राम नवमी की पूर्व संध्या पर मंदिर परिसर में भजन संध्या, कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। स्थानीय कलाकारों ने श्रीराम के जीवन प्रसंगों पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। विशेष आकर्षण रहा “राम जन्म” की लीला, जिसमें बाल श्रीराम के जन्म का सुंदर अभिनय प्रस्तुत किया गया।

प्रशासन की भूमिका

काशी विश्वनाथ धाम के प्रशासन ने इस पूरे आयोजन को भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। पुलिस बल की तैनाती, भीड़ नियंत्रण, स्वच्छता और सफाई की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

धाम के मुख्य कार्याधिकारी श्री महेश सिंह ने बताया, “राम नवमी के इस आयोजन को परंपरा और आधुनिक प्रबंधन के साथ संतुलित करते हुए हमने एक दिव्य आयोजन किया है। श्रद्धालुओं की श्रद्धा ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है।”

काशी में यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान न होकर लोक-आस्था का महोत्सव बन गया है। राम नवमी के इस अवसर पर श्रीराम की भक्ति, श्रद्धा और मर्यादा का संदेश सम्पूर्ण वातावरण में व्याप्त हो गया है। रामकथा के इस अखंड पाठ ने जैसे काशी की आत्मा को छू लिया है और भक्तों को प्रभु श्रीराम की कृपा का अनुभव हुआ है।

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