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जेईई मेंस के परिणाम में एसकेडी के अंकुर ने लहराया परचम..

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जेईई मेंस के परिणाम में एसकेडी के अंकुर ने लहराया परचम

जहानागंज। मंगलवार को घोषित जेईई मेंस 2025 के प्रथम सत्र के परिणाम में क्षेत्र के धनहुंआ स्थित एसकेडी विद्या मंदिर के 12वीं कक्षा के छात्र अंकुर सिंह ने 99.83 प्रतिशताइल हासिल कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इस शानदार उपलब्धि से विद्यालय, अभिभावकों और समूचे क्षेत्र में हर्ष और उत्साह का माहौल है। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर बुधवार को विद्यालय में सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें छात्र को मिठाई खिलाकर सम्मानित किया गया।

विद्यालय में उत्सव का माहौल

बुधवार को जब अंकुर विद्यालय पहुंचे तो पूरा परिसर तालियों और बधाइयों से गूंज उठा। विद्यालय के प्रबंधक विजय बहादुर सिंह, आजमगढ़ के विभाग प्रचारक श्रीमान दीनानाथ जी, प्रधानाचार्या प्रीति यादव, शिक्षकगण, अभिभावक एवं छात्र इस गौरवशाली क्षण के साक्षी बने। समारोह में अंकुर को मिष्ठान खिलाकर सम्मानित किया गया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।

इस अवसर पर विभाग प्रचारक श्रीमान दीनानाथ जी ने कहा, “विद्यार्थी जीवन भी एक साधना की तरह होता है। जो छात्र अनुशासन और मेहनत को प्राथमिकता देते हैं, वे सफलता की ऊंचाइयों को अवश्य प्राप्त करते हैं।” उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्यों और संस्कारयुक्त शिक्षा से ही विद्यार्थी अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं।

विद्यालय के प्रबंधक विजय बहादुर सिंह ने इस अवसर पर कहा, “एसकेडी विद्या मंदिर में तराशे गए हीरे जहां भी जाते हैं, अपनी चमक बिखेरते हैं। अंकुर ने अपनी मेहनत, अनुशासन और समर्पण से यह साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन से हर लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।” उन्होंने विद्यालय के शिक्षकों को भी इस सफलता का श्रेय दिया और कहा कि एसकेडी का हर छात्र आने वाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएगा।

अंकुर की सफलता की कहानी

अंकुर सिंह, जो अब पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन चुके हैं, ने अपनी सफलता के पीछे की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने पढ़ाई के दौरान मोबाइल और ऑनलाइन प्लेटफार्मों से दूरी बनाए रखी और गुरुजनों के मार्गदर्शन में किताबों से गहन अध्ययन किया। उन्होंने अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित रखते हुए नियमित अभ्यास और सेल्फ स्टडी पर विशेष ध्यान दिया।

अंकुर ने कहा, “मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण था कि मैं अनावश्यक संसाधनों से बचूं और केवल उन्हीं पुस्तकों एवं अध्ययन सामग्रियों का उपयोग करूं, जो मेरे परीक्षा के लिए आवश्यक थीं।” उन्होंने बताया कि उन्होंने नियमित नोट्स बनाए, पुराने प्रश्न पत्र हल किए और समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया।

उनकी मां बबली सिंह, जो इस सफलता से अत्यंत भावुक थीं, की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा, “अंकुर बचपन से ही पढ़ाई में अनुशासित रहे हैं। उन्होंने कभी भी पढ़ाई को बोझ नहीं माना, बल्कि इसे एक मिशन की तरह अपनाया। उनकी मेहनत का यह परिणाम हम सभी के लिए गर्व का विषय है।”

विद्यालय और शिक्षकों की भूमिका

अंकुर की इस सफलता में एसकेडी विद्या मंदिर की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। विद्यालय के अनुशासनात्मक वातावरण और शिक्षकों के समर्पण ने छात्रों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। विद्यालय की प्रधानाचार्या प्रीति यादव ने कहा, “अंकुर की सफलता यह साबित करती है कि अगर किसी भी विद्यार्थी को सही मार्गदर्शन, उपयुक्त संसाधन और प्रोत्साहन मिले, तो वह किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।”

उन्होंने कहा कि एसकेडी विद्या मंदिर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देता है और उनकी बौद्धिक एवं नैतिक क्षमताओं को उन्नत करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहता है।

विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक कृष्ण मुरारी ने कहा कि अंकुर एक अनुशासित और मेहनती छात्र थे। उन्होंने बताया, “हमने हमेशा छात्रों को प्रेरित किया है कि वे आत्मनिर्भर बनें और स्व-अध्ययन को प्राथमिकता दें। अंकुर ने हमारे मार्गदर्शन का सही ढंग से उपयोग किया और अपने कठिन परिश्रम से यह शानदार सफलता अर्जित की।”

अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा

अंकुर की यह सफलता केवल उनके परिवार और विद्यालय के लिए नहीं, बल्कि उन सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। समारोह में उपस्थित अन्य छात्रों ने अंकुर से उनकी रणनीति और पढ़ाई के तरीकों के बारे में जानकारी ली।

इस अवसर पर विद्यालय के व्यवस्थापक श्रीकांत सिंह, शिक्षकगण आनंद, अर्चना, रत्नेश समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने अंकुर को शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

भविष्य की योजनाएं

अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में अंकुर ने बताया कि वे अब जेईई एडवांस्ड की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करेंगे और आईआईटी में प्रवेश लेकर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपना योगदान देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में शोध करना चाहते हैं और देश के तकनीकी विकास में योगदान देना चाहते हैं।

अंकुर की इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन मिले, तो कोई भी विद्यार्थी अपने सपनों को साकार कर सकता है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में हर्षोल्लास का माहौल बना हुआ है और वे आने वाले समय में अनेक छात्रों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।

 

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