आजमगढ़ जिले के चौक स्थित महाकाली के दक्षिण मुखी मंदिर में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले वार्षिक श्रृंगार कार्यक्रम का विशेष महत्व है। हर साल नव वर्ष की पूर्व संध्या से भक्तों की भीड़ मंदिर में उमड़नी शुरू हो जाती है, जो चार और पांच जनवरी को मां काली के वार्षिक श्रृंगार तक लगातार बनी रहती है। इस अनुष्ठान में दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं और मां काली के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
मंदिर में विशेष आयोजन और तैयारियां
नव वर्ष के आगमन के साथ ही मंदिर परिसर में वार्षिक श्रृंगार की तैयारियां प्रारंभ हो जाती हैं। इस विशेष आयोजन के दौरान मंदिर के चारों ओर श्रद्धालुओं और व्यापारियों की भीड़ जमा होती है। भक्तजन विभिन्न प्रकार के प्रसाद और पूजा सामग्री लेकर मां काली के चरणों में अर्पित करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।
श्रृंगार कार्यक्रम के दौरान मंदिर की भव्य सजावट की जाती है। माता काली की प्रतिमा को विशेष आभूषण और वस्त्रों से सजाया जाता है। दीपों, फूलों और रोशनी की झिलमिलाहट से पूरा मंदिर परिसर रोशन हो उठता है, जो श्रद्धालुओं के लिए एक दिव्य अनुभव प्रदान करता है।
मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
मंदिर के पुजारी शरद त्रिपाठी ने बताया कि आजमगढ़ का यह दक्षिण मुखी मंदिर तांत्रिक परंपरा से जुड़ा हुआ है और इसका विशेष धार्मिक महत्व है। कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर के बाद इसे भारत का दूसरा प्रमुख दक्षिण मुखी काली मंदिर माना जाता है। तांत्रिक अनुष्ठानों में इस मंदिर की मान्यता के कारण देशभर से भक्त यहां दर्शन करने आते हैं।
मंदिर में चैत्र नवरात्र, शारदीय नवरात्र, विजयदशमी, और नववर्ष जैसे प्रमुख अवसरों पर भक्तों का भारी मेला लगता है। इन त्योहारों के दौरान मंदिर के बाहर बड़े पैमाने पर भंडारे का आयोजन भी होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। यह आयोजन भक्तों की सेवा भावना और मां काली के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है।
बाजार और सामाजिक उत्सव
श्रृंगार के अवसर पर मंदिर के आसपास सजी दुकानों में पूजा सामग्री, प्रसाद, और सजावटी वस्तुएं बिकती हैं। स्थानीय व्यापारियों के लिए यह समय व्यापारिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। मेले के दौरान बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले और खेल-तमाशे भी लगाए जाते हैं, जो पूरे वातावरण को उत्सवमय बना देते हैं।
यह धार्मिक और सामाजिक आयोजन न केवल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है, बल्कि आजमगढ़ जिले की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा भी है।
सुरक्षा और व्यवस्था
श्रृंगार के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन कराने के लिए प्रशासनिक प्रबंध किए जाते हैं। पुलिस बल की तैनाती, चिकित्सा सुविधा, और यातायात प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाती हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
यह वार्षिक आयोजन न केवल एक धार्मिक कृत्य है, बल्कि जनमानस को एकजुट करने वाला सांस्कृतिक उत्सव भी है, जो हर साल मां काली के भक्तों की भक्ति और विश्वास को एक नई ऊंचाई पर ले जाता है। मां काली की महिमा और भक्तों की आस्था का यह संगम आजमगढ़ को एक विशेष पहचान प्रदान करता है।
