यूपी के बांदा में नदियां उफान पर हैं दर्जनों गांव का संपर्क मुख्य सड़कों से टूट चुका है और लोग एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए भी मोहताज हैं। स्थानीय स्तर पर बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों के ग्रामीणों के लिए एकमात्र सहारा प्राइवेट नाव भी प्रशासन की रोक के बाद आज प्रशासनिक देखरेख में चालू हो सकी हैं। बांदा में केन नदी और चंद्रावल नदी का जलस्तर बढ़ने से दर्जनों गांव के बाशिंदे मुसीबत में जूझ रहे हैं, नदियों का जलस्तर बढ़ता देख जिला प्रशासन भी चौकस हो गया है और सारी व्यवस्थाएं मजबूत करने का दावा भी कर रहा है लेकिन बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में फंसे ग्रामीण प्रशासन की व्यवस्थाओं के दावों को नकार रहे हैं।
आपको बता दें कि बांदा को प्रभावित करने वाली नदियों में मुख्य केन नदी है इसके साथ ही रंज नदी, चंद्रावल, बागै और यमुना नदियां हैं जिनमें जलस्तर बढ़ने से सीधे तौर पर बांदा जनपद के सैकड़ों की तादाद में गांव प्रभावित होते हैं। मध्य प्रदेश में हुई बारिश के चलते बांदा में केन नदी के जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है हालांकि अभी यह खतरे के निशान से तकरीबन 5 मीटर नीचे ही है लेकिन इसका जलस्तर बढ़ने से पैलानी तहसील के दर्जनों गांव बाढ़ से घिर चुके हैं। खपटिहा, पैलानी, नांदादेव, अदरी जैसे दर्जनों गांव हैं जिनका संपर्क मुख्य मार्ग से टूट गया है और इन गांवों को पानी ने अपने घेरे में ले रखा है। इसके साथ ही चंद्रावल नदी भी उफान पर है जिसके चलते पैलानी जसपुरा क्षेत्र के दर्जनभर गांव का संपर्क मुख्य सड़कों से टूट चुका है इन गांव के ग्रामीण अस्पताल और अपनी जरूरत के लिए भी नदी को पार कर आने के लिए मजबूर हैं। जिला प्रशासन ने प्राइवेट नावों पर भी रोक लगा रखी थी लेकिन हालात को देखते हुए अब प्राइवेट नाव चलाने की परमिशन दी गई है। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के ग्रामीणों की माने तो इन तमाम क्षेत्रों में पुल बन जाना चाहिए लेकिन आज तक इस तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया तो वहीं नाव ना होने से भी लोग बेहद परेशान हैं। बाढ के पानी की चपेट में आने से सैकड़ों किसानों की फसलें पानी में डूब कर नष्ट हो गई हैं।
वहीं दूसरी तरफ बाढ़ की विभीषिका की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन भी अपनी कवायद में जुटता दिखाई देने लगा है, डीएम बांदा अनुराग पटेल के मुताबिक उन्होंने खपटिहा क्षेत्र में और बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में प्रशासनिक देखरेख में प्राइवेट नावे चलवाने का आदेश दे दिया है और इसी के साथ ही बाढ़ से बचाव के लिए वाहनों के पुराने टायरों को हवा भरवा कर उनका भी इंतजाम नावों में किया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर वह जीवन रक्षक उपकरण के तौर पर काम आ सके । डीएम बांदा का कहना है कि उन्होंने बाढ़ चौकियों और बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों के राजस्व कर्मियों को अलर्ट मोड पर लगा रखा है जिन किसानों का की फसलें बाढ़ से नष्ट हो रही हैं उनका मुआइना कर सरकारी मदद दिलवाने की भी व्यवस्था की जाएगी।
