उत्तर प्रदेश में स्थानीय निकाय क्षेत्र की 36 विधान परिषद (एमएलसी) सीटों में से बीजेपी ने 33 सीटों पर जीत दर्ज की तो सपा अपना खाता भी नहीं खोल सकी. सूबे की 36 एमएलसी सीटों में से 9 सीट पर बीजेपी पहले ही निर्विरोध जीत दर्ज कर चुकी थी और बाकी जिन 27 सीटों पर मतदान हुआ था, उनमें से 24 सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है. इस तरह से बीजेपी को सिर्फ तीन सीटों पर ही मात मिली है. वहीँ बात करें अगर आज़मगढ़ – मऊ के एमएलसी चुनाव की , तो यहाँ पर भाजपा से निष्काषित एमएलसी और दिग्गज नेता यशवंत सिंह के बेटे विक्रांत सिंह रिशु ने निर्दल ही जीत दर्ज की . हालांकि इसके लिए एमएलसी यशवंत सिंह को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी .
विक्रांत सिंह रिशु ने 2813 मतों से भाजपा प्रत्याशी अरुण कांत यादव को करारी शिकस्त दी है . उन्हें कुल 4075 मत प्राप्त हुए हैं . जबकि भाजपा अरुण कांत यादव को 1262 मत मिले. वहीँ सपा प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे . सपा की इस करारी हार का दुःख ज़रूर होगा क्योंकि दोनों जिलों में सपा के कुल १३ विधायक होने के बावजूद उनकी ये हालत है .
बहरहाल विक्रांत सिंह रिशु की इस कामयाबी के पीछे ज़बरदस्त सोशल इंजीनियरिंग और उनके पिता का अनुभव और उनकी रणनीति कारगर रही . सभी वर्गों के मतदाताओं से उन्हें समर्थन मिला , जिससे वह प्रचंड जीत हासिल करने में कामयाब रहे . मीडियाकर्मियों से बातचीत में विक्रांत सिंह रिशु ने सभी का आभार व्यक्त किया है . उन्होंने कहाकि मेरा परिवार भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चंद्रशेखर जी का अनुयायी रहा है . विक्रांत सिंह रिशु के किसी दल में शामिल होने को लेकर उन्होंने कहाकि मेरी श्रद्धा महराज जी , यानि की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ में है .
