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ईंट भट्ठों मे बालश्रम, सरकारी तंत्र खामोश, कलम की जगह हाथों में ईंट पाथने का सामान

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 सर्व शिक्षा अभियान की पोल खुलने के बाद भी ज़िम्मेदारों की नही खुली नींद
विजयीपुर/फतेहपुर :- सर्व शिक्षा अभियान के तहत सब पढ़ें सब बढ़े की तर्ज पर सरकार द्वारा भले ही काम किया जा रहा है लेकिन ईट भट्टो में आज भी बच्चों के बचपन ईट पाथ ने के समान तले रौंदे जा रहे है। सरकार भले ही परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के लिए यूनिफॉर्म से लेकर किताबो तक का इंतजाम कर रही है ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से अछूता न रह पाए। लेकिन आज भी मुफलिसी के चलते ऐसे भी बच्चे है जिनके हाथों में किताब होनी चाहिए। उनके हाथों में पैसे कमाने का समान नजर आ रहा है।
विजयीपुर, सरौली, रारी, बरैची, नरैनी सहित आदि क्षेत्रो में पड़ने वाले ईंट भट्ठा में ईट पाथने वाले बच्चो का बचपन इसी तरह दम तोड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।। क्षेत्र के किशनपुर रोड रारी मोड़ किनारे चल रहे ईट भट्टों में नाबालिक बच्चों से काम करवाया जा रहा है, कम पैसे देने के चक्कर मे भट्ठा मालिक ये तरीका अपनाते हैं, हलाकि ये काम लगभग सभी भट्टों में होता है।किशनंपुर रोड स्थित एक ईंट भट्ठे में छोटे छोटे बच्चों से काम करवाया जा रहा, हालाकि बच्चो की माँ श्याम कली निवासी टेनी ने बताया कि पेट पालने के लिए मजबूरी में इनसे काम करवाते हैं, कोई कमाने वाला भी नही है, देखने वाली बात ये भी रही कि इनके रहने के लिए भी कोई व्यवस्था नही है, न शौच क्रिया जाने के लिए भी बाहर जाना पड़ता है, इतनी ठंड में छप्पर के नीचे रहना पड़ रहा है। भट्टा मालिक केवल अपनी कमाई पर मस्त हैं उन्हें इस बात का कोई मलाल नही है। जबकि नियमानुसार सभी मजदूरों के लिए शौचालय, रहने की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन अधिकांश ईंट भट्ठों में कोई व्यवस्था नही है।

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