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पुलिस कस्टडी में अल्ताफ़ की मौत पर सपा प्रवक्ता ने कहा न्यायायिक हिरासत में दलित पिछड़े मुसलमानों की बढ़ी हत्याएं…

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पुलिस कस्टडी में अल्ताफ़ की मौत-सपा प्रवक्ता बोले न्यायायिक हिरासत में दलित पिछड़े मुसलमानों की बढ़ी हत्याएं…

उत्तर प्रदेश-:उत्तर प्रदेश में पुलिस हिरासत और एनकाउंटर मे मारे गये लोगों पर लगातार सवाल खड़े होते रहे हैं।यहां तक कि अदालतों को भी इस मामले में दखल देना पड़ा है।हाल ही में उत्तर प्रदेश के कासगंज में हुई अल्ताफ की मौत होने के बाद पुलिस द्वारा उसे आत्महत्या बताये जाने पर मामला तूल पकड़ता जा रहा है।विपक्षी दलों समाजवादी पार्टी,बसपा एवं कांग्रेस नेता प्रदेश की योगी सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।

कासगंज में पुलिस हिरासत में अल्ताफ नामक युवक की मौत पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमीक़ जामेई ने भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को निशाने पर लिया है।सपा प्रवक्ता अमीक़ जामेई ने सीएम योगी पर हमला बोलते हुए कहा कि पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों के मामले में यूपी नम्बर वन प्रदेश बन चुका है।उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह धराशायी हो चुकी है एवं जंगलराज और गुंडाराज का बोलबाला है।अमीक़ जामेई ने ये भी कहा कि प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ की पुलिस धर्म और जाति देख कर बेकुसूरों को निशाना बना रही है जो आम जनता भी अब समझने लगी है जिसका जवाब देने के लिये आम आदमी 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव का बेसब्री से इन्तिज़ार कर रहा है।अमीक़ जामेई ने आगे कहा कि न्यायिक हिरासत में मौतों के मामले उत्तर प्रदेश ने देश भर का रिकार्ड तोड़ दिया है एवं ऐसे मामलों में मुसलमानों,दलित और पिछड़ों को निशाना बनाया गया है।प्रदेश में समाजवादी पार्टी के सरकार में आते ही फ़र्ज़ी एनकाउंटर और पुलिस हिरासत में हुई मौतों की निष्पक्ष जांच कर असली दोषियों पर कार्यवाही करने का काम करेगी।

पिछले दिनों जारी किये गये एनएचआरसी के आंकड़ों की माने तो उत्तर प्रदेश में साल 2018-2019 में पुलिस हिरासत में 12 और न्यायिक हिरासत में लगभग 452 लोगों की मौत हो चुकी है इसी क्रम में साल 2019-20 में पुलिस हिरासत में 8 और न्यायिक हिरासत में 443 लोगों की मौत हुई है अगर इन आंकड़ों को जोड़कर देखें तो उत्तर प्रदेश में अब तक लगभग 1400 से ज्यादा लोगों की पुलिस और न्यायिक हिरासत में मौतें हो चुकी हैं जो कि पूरे देश मे होने वाली पुलिस और न्यायिक हिरासत में मौतों का लगभग 23% है।

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