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थारू महिलाओं के हाथों का जादू! कतर्नियाघाट में हस्तनिर्मित चिड़िया का घोंसला बना आकर्षण

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कतर्नियाघाट में थारू जनजाति की महिलाओं के हुनर को मिला सम्मान, राजेश गुप्ता ने खरीदा हस्तनिर्मित चिड़िया का घोंसला

रिपोर्ट – जुनैद खान 

कतर्नियाघाट, बहराइच। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के संकल्प को साकार करने की दिशा में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों की पहल से थारू जनजाति की महिलाओं के पारंपरिक हुनर को नई पहचान मिल रही है। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के कतर्निया रेंज स्थित घड़ियाल सेंटर के बगल में संचालित वनधन केंद्र पर थारू महिलाओं द्वारा तैयार किए गए हस्तनिर्मित उत्पाद पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इसी क्रम में पूर्व मंडल अध्यक्ष एवं सुजौली के ग्राम प्रधान राजेश गुप्ता ने केंद्र पहुंचकर महिलाओं द्वारा तैयार किया गया चिड़िया का हस्तनिर्मित घोंसला खरीदकर उनके हुनर को सम्मान दिया।

राजेश गुप्ता को हाल ही में भारतीय जनता पार्टी के पिछड़ा वर्ग मोर्चा में जिला मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वनधन केंद्र पर पहुंचकर उन्होंने थारू जनजाति की महिलाओं के पारंपरिक कौशल और रचनात्मकता की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में स्वदेशी उत्पादों और ‘मेड इन इंडिया’ को बढ़ावा देने का संकल्प लेकर कार्य कर रहे हैं। ऐसे में हम सभी का दायित्व है कि स्थानीय कारीगरों और जनजातीय समुदाय के लोगों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को खरीदकर उनकी मेहनत को सम्मान दें।

उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर निर्मित वस्तुओं की खरीदारी से महिलाओं को आर्थिक प्रोत्साहन मिलता है और उनके आत्मनिर्भर बनने का मार्ग प्रशस्त होता है। जनजातीय महिलाओं के हाथों से तैयार होने वाले उत्पाद केवल सामान नहीं, बल्कि उनकी पारंपरिक कला, संस्कृति और पीढ़ियों से चले आ रहे ज्ञान का प्रतीक हैं। इन उत्पादों को प्रोत्साहित करने से थारू समुदाय की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में भी मदद मिलेगी।

वनधन केंद्र पर उपलब्ध हैं आकर्षक हस्तनिर्मित उत्पाद

कतर्नियाघाट भ्रमण पर आने वाले पर्यटक घड़ियाल सेंटर के बगल में स्थित वनधन केंद्र से थारू महिलाओं द्वारा तैयार विभिन्न हस्तनिर्मित वस्तुओं की खरीदारी कर सकते हैं। स्टॉल की मुखिया एवं चंदन चौकी निवासी निर्मला के अनुसार केंद्र पर दीवार घड़ी, टोपी, पर्स, चप्पल, बर्तन, चिड़िया के घोंसले सहित कई आकर्षक उत्पाद उपलब्ध हैं।

वनधन केंद्र जनजातीय महिलाओं की प्रतिभा को मंच प्रदान करने के साथ उनकी आजीविका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पर्यटकों द्वारा इन उत्पादों की खरीदारी से महिलाओं को आर्थिक संबल मिलने के साथ उनकी पारंपरिक कला को व्यापक पहचान मिल सकती है। कतर्नियाघाट की प्राकृतिक सुंदरता के बीच यह केंद्र पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक कहानी से भी रूबरू करा रहा है।

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